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Exclusive : सुकमा में 984, बीजापुर में 761..छत्तीसगढ़ के 3000 नक्सल पीड़ित परिवारों को ‘अपना घर’, PM आवास के तहत सपना पूरा

बिगुल
छत्तीसगढ़ सरकार नक्सल प्रभावित सुदूर वनांचलों के परिवारों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए लगातार कोशिश कर रही है. नक्सल पीड़ित परिवारों और आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए PM आवास योजना की विशेष परियोजना के तहत लगभग 3000 आवास बनाए जा रहे हैं. केंद्र सरकार से विशेष अनुरोध कर उन परिवारों के लिए 15,000 आवास स्वीकृत किए गए हैं, जो प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता शर्तों में नहीं आते थे. इन आवासों को मार्च में स्वीकृति मिली थी और मई में काम शुरू हुआ था.

3000 परिवारों के लिए बन रहे आवास
इस परियोजना के तहत अब तक 5000 पात्र परिवारों में से 3000 के लिए आवास स्वीकृत हो चुके हैं. इनमें से 2,111 परिवारों को पहली किस्त और 128 परिवारों को दूसरी किस्त जारी की जा चुकी है. सुदूर वनांचलों में तेजी से इन आवासों का निर्माण हो रहा है. सुकमा की सोडी हुंगी और कांकेर की दशरी बाई के आवास, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद, मार्च में स्वीकृति के बाद मई से शुरू होकर मात्र तीन महीनों में पूरे हो गए हैं.

बस्तर में फिर बसी खुशियां
नक्सल हिंसा से प्रभावित और आत्मसमर्पित नक्सलियों के परिवारों में विशेष परियोजना के तहत पक्के आवासों ने खुशियां लौटाई हैं. दुर्गम क्षेत्रों में भी ये आवास तेजी से बन रहे हैं. शासन-प्रशासन की मदद और परिवारों के हौसले से सपनों के घर हकीकत बन रहे हैं. यह परियोजना छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की दिशा में मील का पत्थर है.

3 महीने में आवास निर्माण पूरा
कांकेर जिला मुख्यालय से लगभग 200 KM दूर कोयलीबेड़ा विकासखण्ड के उलिया ग्राम पंचायत में रहने वाली दसरी बाई नुरूटी के पति दोगे नुरूटी की विधानसभा चुनाव के दौरान माओवादी घटना में मृत्यु हो गई थी. मार्च में उनके लिए आवास को स्वीकृति मिलने के बाद 3 महीने में काम पूरा हो गया है. वहीं, सुकमा जिले के गादीरास ग्राम पंचायत के आश्रित गांव ओईरास की सोडी हुंगी ने भी अपना पक्का आवास तीन महीने में बना लिया है. साल 2005 में उनके पति मासा सोडी की नक्सलियों ने मुखबिरी के संदेह में हत्या कर दी थी.

सुकमा में सबसे ज्यादा 984 परिवारों के आवास स्वीकृत
प्रधानमंत्री आवास योजना में विशेष परियोजना के तहत अब तक करीब 3000 आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल प्रभावित परिवारों के लिए आवास स्वीकृत किए गए हैं. इनमें सर्वाधिक 984 परिवार सुकमा जिले के हैं. बीजापुर जिले में ऐसे 761 परिवारों, नारायणपुर में 376, दंतेवाड़ा में 251, बस्तर में 214, कोंडागांव में 166, कांकेर में 146, गरियाबंद में 27, बलरामपुर-रामानुजगंज में 25 और मानपुर-मोहला-अंबागढ़ चौकी में 23 परिवारों के आवास मंजूर किए गए हैं.

इसे लेकर CM विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विश्वास, विकास और पुनर्वास की रणनीति पर कार्य कर रही है. आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल पीड़ित परिवारों को सम्मानजनक जीवन देने हेतु राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत विशेष परियोजना के लिए केंद्र सरकार से अनुरोध कर 15 हजार आवास स्वीकृत कराए हैं. वहीं, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए पुनर्वास, सुरक्षा और सम्मान की नीति पर कार्य किया जा रहा है. आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों और हिंसा से पीड़ित परिवारों के लिए विशेष परियोजना के अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से जो पहल की गई है, वह सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है.

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