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हाथों में संविधान, तिरंगे के सामने गर्व से उठा सिर… नक्सल प्रभावित सुकमा के 10 गांवों पहली बार मनाया गया गणतंत्र दिवस

बिगुल
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले के 10 गांवों में पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया गया है. जो गांव कभी ‘लाल आतंक’ के साए में थे. जहां कभी गोलियों की गूंज और हिंसा का डर रहता था. उन गांवों में आज हाथों में संविधान की किताब लेकर और तिरंगे के सामने गर्व से सिर उठाकर सलामी देते हुए पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया गया. देश के 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर यहां पहली बार तिरंगा फहराया गया है.

सुकमा के 10 गावों में पहली बार फहराया गया तिरंगा
जिन नक्सलियों ने सुकमा जिले के अंदरूनी इलाकों में दशकों तक बंदूकें थामकर हिंसा की औक संविधान को मानने से इंकार किया. अब वहीं पर हाथों में संविधान की किताब और गर्व से सिर उठाकर तिरंगे को सलामी देकर लोगों ने अपना पहला गणतंत्र दिवस मनाया. हिंसा के अंधकार के बाद अब इलाके में शांति, संविधान पर विश्वास और लोकतंत्र का उजास दिखाई देने लगा है. 4 दशकों से नक्सल उग्रवाद से प्रभावित रहे सुकमा में 10 ऐसे गांव थे, जहां अब तक राष्ट्रीय पर्व मनाना संभव नहीं था. 26 जनवरी 2026 को इन सभी गांवों में पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया गया.

जानें सभी 10 गावों के नाम
गोगुंडा
नागाराम
बंजलवाही
वीरागंगरेल
तुमालभट्टी
माहेता
पेददाबोडकेल
उरसांगल
गुंडराजगुंडेम
पालागुड़ा

41 गांव में मनाया जा रहा पहली बार जश्न
बता दें कि छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित 41 गांवों में पहली बार गणतंत्र दिवस इस साल मनाया गया है. इनमें बीजापुर के 13 गांव, नारायणपुर के 18 और सुकमा जिले के 10 गांव शामिल है. इन सभी गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया जा रहा है.

बता दें कि छत्तीसगढ़ के इन जिलों में अब तक नक्सलियों का खौफ रहता था. अब सुरक्षा कैंप की स्थापना और प्रशासन की मौजदूगी से यहां लोगों के बीच हिंसा और ‘लाल आतंक’ का खौफ खत्म हुआ है.

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