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ककहरा साहित्य महोत्सव : कवियित्री डॉ नैनी तिवारी की कविताओं ने गुदगुदाया, भरत द्विवेदी, राकेश तिवारी, प्रतीक कश्यप, सुनंदा शर्मा, पंखुरी मिश्रा, इरफान खान, मिनेश साहू, ईश्वर साहू ‘बंदी’, रिकी बिंदास की रचनाओं से दहाड़ा ओपन माइक

‎रायपुर. राजधानी के ऐतिहासिक भारत माता चौक, गुढ़ियारी में कल आयोजित हुए विविध सत्रों में द्वितीय ककहरा साहित्य महोत्सव का पूरी भव्यता के साथ आयोजन हुआ। युवा कवि व ककहरा के आयोजक व संयोजक पुष्पराज केसरी के कुशल नेतृत्व में आयोजित इस महोत्सव का औपचारिक शुभारंभ मुख्यअतिथि आशीष राज सिंघानिया (सुप्रसिद्ध लेखक व संस्कृतिकर्मी) द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।

शुरूआत ओपन माइक सेशन से हुई। कवियित्री डॉ नैनी तिवारी की कविताओं ने उपस्थित श्रोताओं—दर्शको को खासा गुदगुदाया. उन्होंने चार से पांच रचनाएं पढ़कर कवि सम्मेलन की शुरूआत की। ‎विशेष काव्य प्रस्तुति में प्रदेश के चुनिंदा कवियों ने अपनी ओजस्वी रचनाओं से समां बांध दिया। विशेष प्रस्तुति देने वाले कवियों में भरत द्विवेदी, राकेश तिवारी, प्रतीक कश्यप, सुनंदा शर्मा, पंखुरी मिश्रा, इरफान खान, मिनेश साहू, ईश्वर साहू ‘बंदी’, रिकी बिंदास आदि शामिल रहे। ‎महोत्सव में साहित्यिक ऊर्जा का अनूठा संगम रहा, जहाँ 30 से अधिक युवा प्रतिभाओं ने ‘ओपन माइक’ सत्र में अपनी प्रतिभा दिखाई. मुख्य अतिथि आशीष राज सिंघानिया ने इस भव्य आयोजन के लिए पुष्पराज केसरी और उनकी पूरी टीम की सराहना की और सफल आयोजन हेतु उन्हें बधाइयां दी.

दूसरी ओर परिचर्चा सत्रों में आमंत्रित वक्ता के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार गिरीश पंकज, प्रकाशक सुधीर शर्मा व वरिष्ठ पत्रकार डॉ. अनिल द्विवेदी ने विभिन्न विषयों पर अपने गहरे विचार रखे. सत्रों के सफल संचालन की जिम्मेदारी युवा पत्रकारद्वय अंबिका मिश्रा व वैभव बेमेतरिहा ने बखूबी निभाई। ‎तीन महत्वपूर्ण विषयों पर गहन परिचर्चा हुई. ‎इस आयोजन के वैचारिक सत्र में प्रदेश के ख्यातिलब्ध मनीषियों ने साहित्य और समाज के अंतर्संबंधों पर अपने विचार साझा किए.

मीडिया, राजनीति और लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व: वरिष्ठ संपादक अनिल द्विवेदी ने लोकतंत्र के सशक्तिकरण में मीडिया की जवाबदेही और राजनीति के प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की। साहित्य पर राजनीति का प्रभाव विषय पर वरिष्ठ साहित्यकार गिरीश पंकज ने राजनीति और साहित्य सृजन के बीच के रिश्तों को रेखांकित किया। छत्तीसगढ़ी एवं हिंदी साहित्य का समानांतर प्रवाह विषय पर वरिष्ठ साहित्यकार सुधीर शर्मा ने छत्तीसगढ़ की भाषाई समृद्धि और दोनों भाषाओं के समन्वय पर जोर दिया।

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