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राशन नहीं मिलने पर फूड अफसर के चेंबर में घुसे ग्रामीण, कलेक्‍टर ने दिए सेल्‍समैन पर FIR के निर्देश

बिगुल
सरगुजा जिले की ग्राम पंचायत अड़ची में रहने वाले ग्रामीणों को पिछले डेढ़ महीने से राशन नहीं मिला है. ग्रामीणों का आरोप है कि उनके हक के राशन का घोटाला किया गया है. गांव वालों ने इस संबंध में जिला प्रशासन के अधिकारियों से अब तक तीन बार शिकायत की, लेकिन किसी तरह की कार्रवाई नहीं होने से नाराज ग्रामीण एक बार फिर कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपनी बात रखी. इस दौरान आक्रोशित ग्रामीण सीधे जिला खाद्य अधिकारी के चेंबर में पहुंच गए और उन्हें चारों तरफ से घेर लिया.

ग्रामीणों ने कहा उनके हक का चावल राशन दुकानदार खा गया
जनवरी माह का राशन नहीं मिलने को लेकर पिकअप वाहन में पहुंचे ग्रामीणों ने कहा कि उनके हक का चावल राशन दुकानदार खा गया है. ग्रामीणों का सवाल था कि आखिर कार्रवाई कब होगी. जब जिला खाद्य अधिकारी की ओर से राशन कार्ड हितग्राहियों को संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो वे वहां से निकलकर कलेक्टर अजीत वंसत से मिलने पहुंच गए. यहां ग्रामीणों ने पूरी स्थिति से कलेक्टर को अवगत कराया.

कलेक्‍टर ने खाद्य अधिकारी को किया तलब
राशन वितरण व्यवस्था में लापरवाही को देखते हुए कलेक्टर अजीत वंसत ने अपने चेंबर में जिला खाद्य अधिकारी एस बी कामटे को तलब किया और पूरे मामले को लेकर सवाल-जवाब किए. इस पर जिला खाद्य अधिकारी ने बताया कि शिकायत मिलने पर जांच टीम गांव भेजी गई थी और जांच प्रतिवेदन एसडीएम के पास लंबित है. जैसे ही कलेक्टर को इसकी जानकारी मिली, उन्होंने एसडीएम को भी अपने चेंबर में बुलाया और पूरे मामले में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए.

अंगूठा लगवाकर कागजों में दिखाय राशन वितरण
इस दौरान कई हितग्राहियों ने बताया कि उनसे ऑनलाइन सिस्टम में अंगूठा लगवाकर कागजों में राशन वितरण दिखा दिया गया है, लेकिन वास्तविक रूप से उन्हें अभी तक चावल नहीं मिला है. जबकि ऑनलाइन अंगूठा लगाने के बाद जनरेट होने वाली स्लिप में चावल वितरण दर्ज है. इससे ग्रामीणों के साथ धोखाधड़ी किए जाने का मामला साफ तौर पर सामने आ रहा है.

कलेक्टर अजीत वंसत ने बताया कि इस पूरे मामले में राशन संचालक के खिलाफ अपराध दर्ज कराने के निर्देश दे दिए गए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीणों को उनके हक का चावल हर हाल में मिले, इसके लिए प्रशासन पूरी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई कर रहा है.

मामले पर उठ रहे गंभीर सवाल
हालांकि, अब सवाल यह भी उठ रहा है कि राशन दुकान का संचालन करने वाले महिला स्वयं सहायता समूह की निगरानी करने वाले फूड इंस्पेक्टर मैदानी स्तर पर आखिर क्या कर रहे थे. जानकारी के अनुसार, ऑनलाइन सिस्टम में राशन दुकान में 190 क्विंटल चावल का स्टॉक दिखाया जा रहा है, जबकि भौतिक रूप से वहां केवल 15 से 20 किलो चावल ही मौजूद है. ऐसे में राशन दुकानदार के साथ-साथ फूड इंस्पेक्टर की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है. क्योंकि नियमों के अनुसार राशन दुकानों का भौतिक सत्यापन नियमित रूप से किया जाता है. अगर सत्यापन किया गया था, तो समय रहते इस गड़बड़ी की जानकारी फूड इंस्पेक्टर को क्यों नहीं मिली. और यदि जानकारी थी, तो जिला स्तर के अधिकारियों को इससे अवगत क्यों नहीं कराया गया.

ग्रामीणों ने भी उठाए सवाल
यही सवाल अड़ची गांव के लोग भी उठा रहे हैं. गांव की सरपंच और पंचों के साथ सैकड़ों महिला-पुरुष जब कलेक्टर से मिलने पहुंचे, तब भी यह मुद्दा प्रमुख रूप से सामने आया. अब देखने वाली बात यह होगी कि ग्रामीणों को उनका राशन कब तक मिल पाता है और उनके हक का राशन खाने वाले राशन दुकान संचालक के खिलाफ क्या ठोस कार्रवाई होती है.

दुकान संचालक ने बताया राशन वितरण में हुई गड़बड़ी
इस पूरे मामले को लेकर राशन दुकान संचालित करने वाले महिला स्वयं सहायता समूह की सचिव फुलेश्वरी से भी बातचीत की. उन्होंने बताया कि राशन वितरण के दौरान गड़बड़ी हुई है और यह सही है कि वर्तमान में राशन स्टॉक में उपलब्ध नहीं है. उन्होंने कहा कि व्यवस्था कर जल्द ही राशन उपलब्ध कराया जाएगा. कुल मिलाकर महिला स्वयं सहायता समूह ने भी यह स्वीकार कर लिया है कि राशन वितरण में गड़बड़ी हुई है.

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