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CAF अभ्यर्थियों का आक्रोश फूटा: डिप्टी सीएम हाउस का घेराव, 7 साल से अटकी भर्ती पर गृहमंत्री ने दिया आश्वासनस

बिगुल
छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स (CAF) की वर्ष 2018 की भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर सियासी और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है। वेटिंग लिस्ट में शामिल 417 अभ्यर्थी पिछले सात वर्षों से नौकरी का इंतजार कर रहे हैं, जबकि CAF में तीन हजार से अधिक पद खाली बताए जा रहे हैं।

राजधानी रायपुर के तूता धरना स्थल पर पिछले 13 दिनों से 100 से अधिक अभ्यर्थी अपने परिवार के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी दौरान एक अभ्यर्थी के छह महीने के बच्चे की तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आने के बाद शनिवार को अभ्यर्थियों का आक्रोश फूट पड़ा और उन्होंने डिप्टी सीएम एवं गृहमंत्री विजय शर्मा के बंगले का घेराव कर दिया।

गृहमंत्री का आश्वासन: CM से चर्चा के बाद होगा फैसला
घेराव के दौरान गृहमंत्री विजय शर्मा ने अभ्यर्थियों से मुलाकात कर उन्हें भरोसा दिलाया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दिल्ली से लौटने के बाद पूरे मामले पर उनसे चर्चा की जाएगी। इसके बाद अभ्यर्थियों के प्रतिनिधि मंडल को बुलाकर समाधान पर निर्णय लिया जाएगा। गृहमंत्री ने तब तक धरना समाप्त करने की अपील भी की।

7 साल से भटक रहे अभ्यर्थी
अभ्यर्थियों का कहना है कि 2018 में निकली भर्ती में मेरिट लिस्ट के उम्मीदवारों को नियुक्ति दे दी गई थी, जबकि वेटिंग लिस्ट के 417 युवाओं को पद खाली न होने का हवाला देकर रोक दिया गया। बाद में कई चयनित उम्मीदवार मेडिकल में फेल हुए या नौकरी छोड़ गए, जिससे पद खाली हुए, लेकिन सरकार बदलने के साथ यह प्रक्रिया ठप पड़ गई।

समय बीतने के साथ इनमें से 250 से ज्यादा अभ्यर्थी ओवरएज हो चुके हैं और अब किसी अन्य भर्ती के योग्य भी नहीं रहे। कभी 28 से 32 वर्ष की उम्र में परीक्षा देने वाले ये युवा आज 36 से 40 वर्ष की उम्र पार कर चुके हैं।

CAF में भर्ती ही नहीं, हजारों पद अब भी खाली
अभ्यर्थियों का दावा है कि पिछले छह वर्षों में CAF में कोई नई भर्ती नहीं हुई है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ पुलिस बल में कुल 83,259 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से करीब 17,820 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। नियमों के अनुसार नई भर्ती न होने तक वेटिंग लिस्ट को वैध माना जा सकता है और सरकार चाहे तो इन रिक्त पदों पर नियुक्ति दी जा सकती है।

“हमारे हिस्से अभी भी सिर्फ इंतजार”
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी जितेंद्र दास कहते हैं कि उन्होंने तीन सरकारें देख लीं, लेकिन उनके हिस्से सिर्फ इंतजार ही आया। परिवार चलाने के लिए कई अभ्यर्थियों को मजदूरी करनी पड़ रही है। किसी के पास बच्चों की पढ़ाई के पैसे नहीं हैं, तो किसी के माता-पिता मदद की गुहार लगाते नजर आ रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद सरकार इस सात साल पुराने जख्म पर कोई ठोस फैसला लेती है या CAF अभ्यर्थियों का इंतजार और लंबा होगा।

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