पर्यटन, संस्कृति और विरासत से संवरा छत्तीसगढ़, दो वर्षों में विकास की नई कहानी

बिगुल
रायपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग ने बीते दो वर्षों की उपलब्धियों और आने वाले समय की कार्ययोजना को सामने रखा। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार की नीतियों के चलते पर्यटन अब छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनता जा रहा है, वहीं संस्कृति और पुरातत्व ने प्रदेश की पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाई दी है।
प्रेस वार्ता में बताया गया कि पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिए जाने के बाद निजी निवेश तेजी से बढ़ा है। इन्वेस्टर कनेक्ट जैसे कार्यक्रमों के जरिए 500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश सुनिश्चित हुआ है। इससे होटल, रिसॉर्ट, साहसिक और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिला है। रामलला दर्शन योजना के तहत विशेष ट्रेनों से हजारों श्रद्धालुओं को अयोध्या दर्शन कराया गया, जिससे धार्मिक पर्यटन को नई गति मिली।
ग्रामीण पर्यटन को बढ़ाने के लिए नई होम-स्टे नीति लागू की गई है। इसके तहत राज्य में 500 नए होम-स्टे विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। नीति के अंतर्गत पूंजी निवेश और ब्याज सब्सिडी जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिल सकें।
फिल्म और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए नवा रायपुर में 350 करोड़ रुपये की लागत से एकीकृत फिल्म सिटी और कन्वेंशन सेंटर विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना छत्तीसगढ़ को फिल्म निर्माण और सांस्कृतिक आयोजनों के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
धार्मिक और विरासत पर्यटन के क्षेत्र में भी बड़े कदम उठाए गए हैं। भोरमदेव मंदिर कॉरिडोर परियोजना को स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत विकसित किया जा रहा है, जिससे इस ऐतिहासिक धरोहर को राष्ट्रीय पहचान मिलेगी। वहीं सिरपुर को विश्व धरोहर स्थल के रूप में विकसित करने के लिए एकीकृत मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है।
चित्रकोट जलप्रपात को वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना पर भी काम चल रहा है। इसके तहत ‘चित्रकोट इंडिजिनस नेचर रिट्रीट’ परियोजना प्रस्तावित है, जिसके लिए केंद्र सरकार से 250 करोड़ रुपये की सहायता अपेक्षित है।
पर्यटन के प्रचार-प्रसार के लिए छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड ने देश और विदेश में कई कार्यक्रमों में भाग लिया। इससे राज्य के पर्यटन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली। इसके परिणामस्वरूप टूर और ट्रैवल ऑपरेटरों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है और पर्यटन मंडल के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
संस्कृति विभाग की उपलब्धियों पर भी जानकारी दी गई। कलाकारों और साहित्यकारों के लिए चिन्हारी पोर्टल के माध्यम से पंजीयन और पेंशन योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। कलाकार कल्याण कोष के जरिए जरूरतमंद कलाकारों और उनके परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है।
बस्तर पंडुम 2026 के आयोजन से जनजातीय संस्कृति, नृत्य, लोकगीत, हस्तशिल्प और परंपराओं को संरक्षण और प्रचार मिल रहा है। वहीं पुरातत्व विभाग के उत्खनन कार्यों से प्रदेश के प्राचीन इतिहास को लेकर नई जानकारियां सामने आई हैं, जिससे छत्तीसगढ़ की विरासत का महत्व और बढ़ा है।
कुल मिलाकर, पर्यटन, संस्कृति और पुरातत्व के क्षेत्र में बीते दो वर्षों में किए गए प्रयासों ने छत्तीसगढ़ को विकास, पहचान और गौरव की नई दिशा दी है।



