विवाद : राधिका खेड़ा खेल रही हैं विक्टिम कार्ड ? मीडिया प्रभारी बनकर आईं तो संचार विभाग को नजरअंदाज किया..खुद का गुट बनाया..जानिए विवाद की अंदरूनी कहानी

बिगुल
रायपुर. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय प्रवक्ता व अध्यक्ष मीडिया विभाग पवन खेड़ा ने कल साफ कहा कि राधिका खेड़ा विवाद हमारे परिवार के बीच का मामला है, सुलझा लेंगे.
जानते चलें कि कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता और प्रदेश मीडिया प्रभारी राधिका खेड़ा ने कल एक टिवट करते हुए कहा था कि कौशल्या माता के मायके में बेटी सुरक्षित नहीं है। पुरुषवादी मानसिकता से ग्रसित लोग आज भी बेटियों को पैरों तले कुचलना चाह रहे हैं. करूंगी खुलासा..! इसके बाद पार्टी के अंदर सांप सूंघ गया।
क्यों दी पार्टी छोड़ने की धमकी
इसी के साथ राधिका खेड़ा का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें वे रोते हुए नजर आ रही हैं. कह रही हैं कि ‘सर ऐसा नही है कि मैं पार्टी छोड़कर जा रही हूं लेकिन आज जो मेरे साथ बदतमीजी हुई है, वो 40 साल के जीवन में नही हुई. जो मेरी इंसल्ट हुई, मुझ पर चिल्लाया गया, मुझे गेट आउट कहा गया. मैं जब बात करती हूं तो वो मुझ पर चिल्लाता है. मैंने ये पहले भी बताया था.’ राधिका ने इसकी शिकायत प्रदेश के बड़े नेताओं और राष्ट्रीय स्तर के कुछ नेताओं से भी की.
नतीजन भाजपा को विवाद में कूदने का मौका मिल गया। भाजपा प्रवक्ता केदारनाथ गुप्ता ने कहा कि “कांग्रेस प्रवक्ता राधिका खेड़ा जी का अपमान किया, महिला का सम्मान हम हमेशा करते हैं और हम राधिका जी के साथ हैं। कांग्रेस के लिए ये नया नहीं हैं, सनातन का अपमान करने वाले ऐसे गलतियां करते रहते हैं”
कोआरडिनेशन की कमी ने बढ़ाया विवाद
हालांकि राधिका ने इस वीडियो में या पोस्ट में किसी नेता का नाम नही लिया मगर समझा जा रहा है कि प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला और राधिका खेड़ा के बीच शाम को 6.30 बजे गरमागरम बहस हुई. वहां मौजूद दो प्रवक्ता इसके गवाह थे. इनमें से एक ने बताया कि राधिका खेड़ा सीधे संचार विभाग के कमरे में आईं और कहा कि पवन खेड़ा की पीसी तय हो गई है, अब आगे क्या करना है. इस पर संचार विभाग के अध्यक्ष शुक्ला ने कहा कि जब आपने (राष्ट्रीय प्रवक्ता) तय कर लिया तो अब हम क्या कर सकते हैं!’ इस पर राधिका ने पलटकर जवाब दिया कि आप ऐसे कैसे बात कर रहे हैं! मैं राष्ट्रीय प्रवक्ता हूं. इस पर शुक्ला ने कहा कि मैं भी संचार विभाग का अध्यक्ष हूं. आपको कोआरडिनेशन करके चलना चाहिए.
राधिका ने खेला विक्टिम कार्ड
इसी बीच राधिका खेड़ा अचानक कैमरा निकालकर खुद ही वीडियो बनाने लगी. तब दोनों प्रवक्ताओं को आश्चर्य हुआ कि राधिका ऐसा क्यों कर रही हैं. कहीं ये प्रीप्लांड तो नही है. उन्होंने उठकर दरवाजा बंद करना चाहा तो राधिका बड़बड़ाते हुए बाहर चली गईं लेकिन यहां पटाक्षेप नही हुआ. राधिका नीचे के तल में स्थित प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैंदू के कमरे में पहुंची और वहां जाकर रोने लगी लेकिन उन्होंने वीडियो बनाना जारी रखा. आश्चर्य कि इसे मीडिया को भी जारी कर दिया गया जिसके बाद घर की बात ओपन हो गई. राधिका के टिवट ने ही आग में घी डालने का काम भी किया. छोटे से विवाद को उन्होंने थाने तक खींच डाला और पार्टी छोड़ने की धमकी भी दे डाली.
शुक्ला ने साधी चुप्पी
इसके विपरीत प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने इस विवाद को अपने तक सीमित रखा. उन्होंने ना तो वीडियो बनाया, ना ही टिवट किया और ना मीडिया से चर्चा की. इस संवाददाता से भी उन्होंने “घर” का मामला बताकर पल्ला झाड़ लिया. लेकिन राधिका ने प्रदेश की मीडिया से लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व तक हल्ला कर डाला.
बात कैसे बिगड़ी..?
एक सीनियर प्रवक्ता ने दुखी मन से कहा कि ‘राधिका की पीसी हो या प्रेस बयान, सुशील आनंद शुक्ला सहित हम सभी हमेशा उनके साथ बैठते हैं. दरअसल राधिका को जब भी पीसी लेनी होती थी तो वे संचार विभाग के इनपुट को दरकिनार करती। नतीजन एक दो बार वे पत्रकारों के सवालों पर बुरी तरह फंस गई. इस पर शुक्ला ने उन्हें सलाह दी थी कि मैडम, आप चाहें तो प्रदेश की रिसॅर्च टीम का साथ ले सकती हैं लेकिन राधिका ने इस पर कान नही धरे. वे इस बात से भी खिन्न हैं कि स्थानीय मीडिया उनकी पीसी को कवर क्यों नहीं करता। शायद राष्ट्रीय प्रवक्ता का इगो’ उनके आडे आ रहा था. एक पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा से भी राष्ट्रीय मिडिया प्रभारी छत्तीसगढ़ आते हैं लेकिन वे छत्तीसगढ़ की टीम को अंडरएस्टीमेट नही करते। बल्कि स्थानीय टीम को आगे रखकर चलते हैं। पर राधिका खेड़ा यह बड़प्पन दिखाने से चूक गईं।
असंतुलित मीडिया प्रबंधन
संचार विभाग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक लोकसभा चुनाव में सारा मीडिया प्रबंधन राधिका खेड़ा खुद देख रही हैं जबकि उन्हें संचार विभाग को साथ लेकर चलना चाहिए. राधिका ने बड़े मीडिया हाउसों इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट का दौरा किया तथा मीडिया पैकेज तय करवा दिए. शुक्ला की सलाह थी कि चाहे केन्द्र से निर्देश हों या प्रदेश से, हमें सभी मीडिया हाउसों का ध्यान रखना चाहिए लेकिन बात जमी नही और राधिका का मीडिया प्रबंधन सिर्फ गिने चुने बड़े मीडिया हाउसों तक ही सीमित हो गया. जबकि विधानसभा में शुक्ला ने ही संभाला। खैर इससे मनमुटाव बढ़ता चला गया जो इस बड़े विस्फोट के बाद समाप्त हुआ. देखना होगा कि ऐन लोकसभा चुनाव के वक्त राधिका और शुक्ला की यह लड़ाई पार्टी को कितना डैमेज करती है..?