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लाल आतंक का अंत: 108 नक्सलियों का सरेंडर, सिर पर था 3.95 करोड़ का इनाम; अब तक का सबसे बड़ा डंप भी बरामद

बिगुल
जगदलपुर में ‘पूना मारगेम’ पहल के तहत डीकेएसजेडसी के 108 माओवादी कैडरों ने हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं। बस्तर आईजी ने 31 मार्च की डेडलाइन से पहले मुख्यधारा में आने की अपील की है।

बस्तर रेंज के विभिन्न जिलों से डीकेएसजेडसी के 108 माओवादी कैडरों ने बुधवार को जगदलपुर में ‘पूना मारगेम’ पहल के तहत हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया है। फिलहाल, पुलिस आज दोपहर 3 बजे प्रेस वार्ता कर इसकी पूरा जानकारी देगी। इन सरेंडर करने वाले नक्सलियों की निशानदेही पर सुरक्षा बलों ने नक्सल विरोधी अभियानों के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी हथियारों-विस्फोटकों की डंप बरामद किया है।

3 करोड़ 95 लाख रुपये का इनाम है घोषित
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों पर 3 करोड़ 95 लाख रुपये का इनाम घोषित है। मुख्य धारा में लौटने वाले माओवादी बीजापुर, नारायणपुर, बस्तर, कांकेर, सुकमा और दंतेवाड़ा जिले के निवासी हैं। इनमें 6 डिवीजन कमेटी मेंबर, 3 कंपनी पार्टी कमेटी मेंबर, 18 पीपीसीएम रैंक और 23 एरिया कमेटी रैंक के माओवादी शामिल हैं।

बस्तर रेंज पुलिस महानिरीक्षक की अपील
बस्तर रेंज पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने बताया कि 31 मार्च की समय सीमा दी गई है। उन्होंने नक्सलियों से जल्द मुख्यधारा में जुड़ने की अपील की है। चेतावनी दी गई है कि जो नहीं जुड़ेंगे उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। यह पुनर्वास से पुनर्जीवन पहल का हिस्सा है। समाज के वरिष्ठ जन, पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के अधिकारी मौजूद रहेंगे। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे।

सबसे बड़ी डंप की बरामदगी
हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में आने वाले कैडरों ने महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं। इन जानकारियों के आधार पर एक बड़ी सफलता मिली है। देश के नक्सल विरोधी अभियानों के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी डंप बरामद की गई है। यह डंप हथियारों और अन्य सामग्री का जखीरा है।

बीजापुर जिला सहित बस्तर रेंज के कई जिलों से यह डंप बरामद हुआ है। इसे रेंज मुख्यालय जगदलपुर में प्रदर्शित किया जाएगा। आत्मसमर्पण और पुनर्वास कार्यक्रम के दौरान इसे जारी किया जाएगा। यह बरामदगी सुरक्षा बलों की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

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