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छत्तीसगढ़ में संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष पर फोकस, लेकिन एलीफेंट सफारी परियोजना पर अब भी सवाल!

बिगुल
पूरे देश में विश्व हाथी दिवस (World Elephant Day) मनाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य हाथियों के संरक्षण (Elephant Conservation) और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए जागरूकता फैलाना है। छत्तीसगढ़ में यह दिन खास मायने रखता है क्योंकि यहां मानव-हाथी संघर्ष (Human-Elephant Conflict) एक गंभीर चुनौती बना हुआ है।

World Elephant Day 12 august
हाथियों की सबसे मजबूत याददाश्त और बढ़ती चुनौतियां
हाथी अपनी बेहतरीन याददाश्त (Elephant Memory Power) के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इन दिनों वे कई संकटों से जूझ रहे हैं। इसमें आवास का नुकसान (Habitat Loss), अवैध शिकार (Poaching), और मानव-हाथी संघर्ष जैसी समस्याएं शामिल हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, इन चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

छत्तीसगढ़ की एलीफेंट सफारी योजना कहां तक पहुंची?
कुछ साल पहले राज्य में एलीफेंट सफारी (Elephant Safari Project) शुरू करने की घोषणा हुई थी, जो हाथियों के संरक्षण और पर्यटन (Wildlife Tourism in Chhattisgarh) को बढ़ावा देने का एक प्रयास था। हालांकि, इस परियोजना की वर्तमान स्थिति को लेकर कोई आधिकारिक अपडेट सामने नहीं आया है।

मानव-हाथी संघर्ष, छत्तीसगढ़ की गंभीर समस्या
छत्तीसगढ़ के कई जिलों, खासकर जशपुर, रायगढ़ और सरगुजा में मानव-हाथी संघर्ष (Man-Animal Conflict) लगातार बढ़ रहा है। इससे फसलों का नुकसान (Crop Damage by Elephants), जनहानि (Loss of Human Life) और संपत्ति हानि (Property Loss) जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं।

रायपुर में प्रोजेक्ट एलीफेंट की स्टीयरिंग कमेटी मीटिंग
बता दें, विश्व हाथी दिवस के मौके पर पिछले वर्ष राजधानी रायपुर (Raipur) में प्रोजेक्ट एलीफेंट (Project Elephant India) की 20वीं स्टीयरिंग कमेटी (Steering Committee Meeting) आयोजित हुई थी। इस बैठक में भारत सरकार के उच्च अधिकारी, वन्यजीव विशेषज्ञ (Wildlife Experts), और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

बैठक में मानव-हाथी संघर्ष की रोकथाम (Conflict Mitigation), जन-धन हानि के प्रबंधन (Damage Management), और संरक्षण रणनीतियों (Conservation Strategies) पर चर्चा हुई। इसके साथ ही हाथी मित्र दल (Elephant Mitra Dal) और समाजसेवी संगठनों से भी सुझाव लिए गए। लेकिन, इस बैठक का परिणाम और परियोजना के बारे में अबतक यह सामने नहीं आ पाया कि यह प्रोजेक्ट कहांतक पहुंचा।

नेतृत्व और संरक्षण की दिशा में प्रयास
बताते चलें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) के नेतृत्व में देश में जैव विविधता संरक्षण (Biodiversity Conservation) की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय (CM Vishnudev Sai), जो वनांचल क्षेत्रों से आते हैं, मानव-हाथी संघर्ष के मुद्दों से भलीभांति परिचित हैं और इसे कम करने के लिए सक्रिय पहल कर रहे हैं। लेकिन, एलीफेंट सफारी परियोजना को देखकर लगता है कि यह परियोजना सिर्फ कागजों में दबकर रह गई है और आगे कोई अपडेट नहीं है।

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