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सुकमा में नक्सलवाद पर तगड़ा प्रहार: डेढ़ साल में 395 गांवों तक पहुंचा प्रशासन, कोर इलाकों में बढ़ी फोर्स

बिगुल
बस्तर के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले की तस्वीर और यहां के हालात तेजी से बदल रहे हैं. नक्सलवाद के खिलाफ पुलिस और अर्धसैनिक बलों की संयुक्त रणनीति अब जमीनी स्तर पर असर दिखा रही है. 1 जनवरी 2024 से अप्रैल 2025 के बीच प्रशासन ने यहां 13 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए. इन कैंपों की स्थापना से नक्सलियों के कोर क्षेत्रों में स्थित 65 गांवों तक प्रशासन की सीधी पहुंच संभव हो पाई है. इस अवधि में 64 नक्सली मारे गए, 433 नक्सली गिरफ्तार हुए और 497 ने आत्मसमर्पण किया. अधिकारियों के मुताबिक महज एक साल में सुकमा के 395 गांवों तक पहुंच आसान हो गई है, जहां पहले विकास कार्य और सरकारी योजनाएं पहुंचाना बेहद मुश्किल था.

बदलाव का रोडमैप, यात्री बस सेवा से बढ़ा आवागमन
सुकमा जिले के कोरा इलाकों में खोले गए नए सुरक्षा कैंप सिर्फ ऑपरेशन का ठिकाना नहीं बने, बल्कि वे विकास के नए केंद्र बनते जा रहे हैं. इन कैंपों से न केवल सुरक्षा बलों की गतिविधियां तेज हुई हैं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार भी हुआ है. जिन इलाकों में पहले शाम ढलते ही सन्नाटा छा जाता था, वहां अब लोग देर रात तक अपने रोजमर्रा के काम निडर होकर करते हैं. नक्सली गतिविधियों में कमी का सीधा असर यातायात पर भी पड़ा है. अब यात्री बसें उन मार्गों तक पहुंच रही हैं, जो कभी नक्सलियों के हमलों और सड़क किनारे बम धमाकों के लिए कुख्यात थे. इन बस सेवाओं के विस्तार से ग्रामीणों को बाजार, अस्पताल और स्कूल जाने में आसानी हो रही है.

कोंटा के दुर्गम गांवों में पहली बार लहराएगा तिरंगा
आजादी के 78 साल बाद इस स्वतंत्रता दिवस पर सुकमा के कोंटा ब्लॉक के दो गांव- उसकेवाया और नुलकातोंग में पहली बार तिरंगा फहराया जाएगा. यहां मार्च 2025 में नया सुरक्षा कैंप खुलने के बाद हालात तेजी से बदले हैं. उसकेवाया और नुलकातोंग, दोनों गांव लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों के गढ़ रहे. यहां माओवादी बैठकों, हथियार प्रशिक्षण और हमलों की योजना बनाना आम बात थी. इलाके की भौगोलिक दुर्गमता और सुरक्षा बलों की सीमित पहुंच के कारण प्रशासन यहां कोई स्थायी मौजूदगी नहीं बना पाया था. लेकिन मार्च में सुरक्षा बलों ने न सिर्फ कैंप खोला, बल्कि सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का काम भी शुरू कराया.

हथियार और विस्फोटक बरामद
सुरक्षाबलों ने इस अवधि में 97 हथियार और 125 आईईडी बरामद किए. अधिकारियों का कहना है कि ये बरामदगी नक्सलियों की हमलावर क्षमता को काफी हद तक कम करती है. IED बरामद होने से जवानों और ग्रामीणों की जान पर मंडराने वाला बड़ा खतरा टल गया. शासन की नई पुनर्वास नीति एवं सुकमा पुलिस द्वारा चलाई जा रही पुना नर्कोम अभियान ने नक्सलियों को हथियार छोड़ने के लिए प्रेरित किया है. आत्मसमर्पण करने वालों में कई ऐसे हैं, जो सालों तक पुलिस को वांछित सूची में थे. उन्हें अब खेती, रोजगार और समाज में सम्मानजनक जीवन का अवसर मिल रहा है.

पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण का कहना है कि सुरक्षा कैंप सिर्फ ऑपरेशन का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि ये इलाके में स्कूल, स्वास्थ्य और आजीविका योजनाओं के केंद्र भी बनते जा रहे हैं. स्थानीय युवाओं को खेल, प्रशिक्षण और रोजगार के मौके मिल रहे हैं. यह बदलाव केवल शुरुआत है, और आने वाले समय में जिले के बाकी दुर्गम इलाकों को भी नक्सलियों के प्रभाव से मुक्त कर मुख्यधारा में जोड़ा जाएगा.

नक्सलियोंं के कोर इलाकों में खोले गए 13 नए सुरक्षा कैंप
टेकलगुड़ेम, पूवर्ती, मुरकराजकोंडा, दलेड़, पुलनपाड़, लखापाल, तुमालपाड़, रायगुडेम, गोलाकोंडा, गोमगुड़ा, मेटागुड़ा, उसकेवाया व नुलकातोंग यह वह नक्सलियोंं के कोर इलाके हैं, जहां 13 नए सुरक्षा कैंप खोले गए हैं.

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