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लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल को हाई कोर्ट से राहत नहीं, कभी भी चल सकता है बुलडोजर

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अंबिकापुर के लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए नगर निगम प्रशासन ने डेढ़ महीने पहले आदेश जारी किया है, लेकिन अब तक आदेश के मुताबिक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है जबकि हाई कोर्ट या फिर किसी भी संस्था से कोई राहत नहीं मिली है.

अंबिकापुर के लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए नगर निगम प्रशासन ने डेढ़ महीने पहले आदेश जारी किया है, लेकिन अब तक आदेश के मुताबिक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है जबकि हाई कोर्ट या फिर किसी भी संस्था से कोई राहत नहीं मिली है. वहीं स्थानीय लोग भी लगातार नगर निगम, कलेक्टर, पुलिस और अलग-अलग विभागों में आवेदन देकर अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल की बील्डिंग में अवैध निर्माण
लोगों का कहना है कि अस्पताल संचालित तो किया जा रहा है, लेकिन पार्किंग की व्यवस्था नहीं है. दूसरी तरफ नगर निगम प्रशासन ने भी अस्पताल की बिल्डिंग के निर्माण को अवैध पाया है. अवैध निर्माण को तोड़ने के लिए अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिया है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने अब तक खुद से बिल्डिंग के अवैध हिस्से को नहीं तोड़ा है. इसकी वजह से स्थानीय लोग नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं.

वही इस पूरे मामले को लेकर नगर निगम आयुक्त डीएन कश्यप ने बयान दिया है, उन्होंने कहा है कि जिस बिल्डिंग में लक्ष्मी नारायण हॉस्पिटल का संचालन किया जा रहा है. उसका अवैध तरीके से निर्माण किया गया है. बिल्डिंग निर्माण आवासीय और व्यावसायिक उपयोग के लिए किया गया था लेकिन अब उसमें अस्पताल का संचालन किया जा रहा है, वहीं जितने क्षेत्रफल में बिल्डिंग निर्माण किया जाना था उससे अधिक क्षेत्र में बिल्डिंग का निर्माण किया गया है और अवैध तरीके से किए गए निर्माण को तोड़ने के लिए आदेश जारी किया गया था लेकिन उसके बावजूद बिल्डिंग मालिक के द्वारा अवैध निर्माण के हिस्से को नहीं तोड़ा गया है, अब नगर निगम प्रशासन इस पर कार्रवाई करेगा.

हाई कोर्ट से राहत नहीं, कभी भी चल सकता है बुलडोजर
नगर निगम आयुक्त का कहना है कि बिल्डिंग मालिक इस पूरे मामले को लेकर हाई कोर्ट भी जा चुके हैं लेकिन उन्हें वहां से कोई राहत नहीं मिली है. हाई कोर्ट ने नगर निगम को आदेश दिया है कि आप जो कार्यवाही कर रहे हैं नियम के अनुसार वह कार्रवाई करें इसीलिए नगर निगम के द्वारा अस्पताल के बिल्डिंग मलिक को अवैध निर्माण को तोड़ने का आदेश दिया गया है. सबसे बड़ी हैरानी की बात तो यह है कि स्थानीय लोग अलग-अलग दफ्तरों में पहुंचकर शिकायत कर रहे हैं लेकिन उसके बावजूद उनके शिकायतों पर भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. यही वजह है कि स्थानीय लोग अब सीधे तौर पर जिम्मेदार अफसर पर भी अस्पताल प्रबंधन से मिली भगत का आरोप लगाने लगे हैं. उनका कहना है कि इस अस्पताल के खिलाफ पहले भी जांच हुई है और जांच में शिकायत सही पाई गई है.

अस्पताल का लाइसेंस जिन शर्तों पर दिया गया है वह शर्त भी यह अस्पताल पूरा नहीं कर रहा है लेकिन इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग के द्वारा इस अस्पताल को लाइसेंस दिया गया है वह गलत है. अगर इस पूरे मामले की जांच की जाती है तो अस्पताल का लाइसेंस निरस्त हो सकता है या फिर पूर्व में किए गए जांच के आधार पर कार्रवाई की जा सकती है.

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