डिप्टी सीएम विजय शर्मा के सामने नक्सली कमांडर पापाराव का सरेंडर, 18 साथियों के साथ डाले हथियार

बिगुल
छत्तीसगढ़ के बस्तर में लंबे समय से सक्रिय कुख्यात नक्सली कमांडर पापा राव ने आखिरकार हथियार छोड़ने का फैसला कर लिया है। नक्सल आंदोलन का बड़ा चेहरा माने जाने वाले कमांडर पापा राव ने कल यानी 24 मार्च मंगलवार को अपने 18 से अधिक साथियों के साथ बीजापुर के कुटरू थाना पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया।
बताया जा रहा है कि, इसमें 7 महिला नक्सली भी शामिल हैं। अब आज वह औपचारिक रूप से डिप्टी सीएम विजय शर्मा के सामने सरेंडर करेंगे। जहां पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा बल और जिला प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। सरेंडर करने वालों में DVCM प्रकाश मड़वी और अनिल ताती जैसे अहम नक्सली भी शामिल हैं।
कौन है कुख्यात नक्सली कमांडर पापा राव
सुन्नम पापाराव को मंगू दादा और चंद्रन्ना के नाम से भी जाना जाता है। ये छत्तीसगढ़ के मोस्ट वॉन्टेड नक्सलियों में शामिल रहा है। वह दंडकारण्य जोनल कमेटी का एक कद्दावर सदस्य और वेस्ट बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज रह चुका है। उस पर 25 लाख रुपए का इनाम घोषित था। करीब दो दशकों तक बस्तर के घने जंगलों में दहशत का पर्याय रहे पापा राव का यह कदम सिर्फ एक सरेंडर नहीं, बल्कि एक लंबे दौर के अंत का संकेत माना जा रहा है।
उन्होंने खुद बताया कि पिछले 10 दिनों से वह इस फैसले को लेकर सोच रहे थे। आखिरकार उन्होंने हथियार छोड़कर संविधान के रास्ते पर चलने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने बाकी साथियों से भी अपील की है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट आएं।
सुकमा जिले के निमलगुड़ा गांव का रहने वाला है। 50 साल से अधिक उम्र के इस कमांडर ने 1990 के दशक में माओवादी संगठन का दामन थामा था। धीरे-धीरे वेस्ट बस्तर डिवीजन की कमान संभाल ली। कई बड़े हमलों की साजिश रचने के आरोपों के साथ वह लंबे समय तक सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बना रहा। 25 लाख रुपए का इनाम होने के बावजूद वह हर बार घेराबंदी से बच निकलता था।
हिडमा के मारे जाने के बाद पापा राव को इस क्षेत्र का सबसे अनुभवी और खतरनाक कमांडर माना जाने लगा था। ऐसे में उनका सरेंडर सुरक्षा बलों के लिए बड़ी सफलता है। बस्तर के आदिवासी इलाकों में इस खबर से राहत की भावना है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि अब हिंसा का यह दौर खत्म होने की ओर बढ़ेगा।



