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कोल माइंस की ब्लास्टिंग से कांप रहा राम मंदिर, खतरे में भारत की सबसे प्राचीन नाट्य शाला व रामगढ़ पहाड़ी

बिगुल

कोल माइंस में ब्लास्टिंग की वजह से प्राचीन रामगढ़ पहाड़ अब खतरे में दिखाई दे रहा है. इसे बचाने के लिए पूर्व उप मुख्यमंत्री TS सिंहदेव ने स्थानीय लोगों के साथ महिम शुरू कर दी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि ब्लास्टिंग की वजह से रामगढ़ पहाड़ में बड़े-बड़े दरार हो गए हैं और अब लैंडस्लाइडिंग की घटना हो रही है जिसकी वजह से पहाड़ में मंदिर तक पहुंचाने का रास्ता कभी भी बंद हो सकता है.

ब्लास्टिंग से रामगढ़ पहाड़ी में लैंड स्लाइड
सरगुजा जिले में स्थित रामगढ़ पहाड़, इस पहाड़ में प्राचीन भगवान श्री राम और लक्ष्मण का मंदिर है. इस प्राचीन मंदिर में सरगुजा संभाग सहित दूसरे राज्यों से भी लोग आकर लाखों की संख्या में हर साल पूजा अर्चना करते हैं इतना ही नहीं यहां पर सीता बेंगरा नमक प्राचीन गुफा है जिसे पुरातत्व विभाग ने संरक्षित किया हुआ है लेकिन पहाड़ से कुछ दूरी पर कॉल माइंस में किए जाने वाले ब्लास्टिंग की वजह से आप पूरा पहाड़ हिलने लगा है. ब्लास्टिंग की वजह से होने वाले झटके के कारण प्राचीन राम मंदिर भी कांप रहा है। इसकी वजह से स्थानीय लोगों का अब कहना है कि कोल माइंस का एक्सटेंशन नहीं होना चाहिए.

खतरे में भारत की सबसे प्राचीन नाट्य शाला व रामगढ़ पहाड़ी
रामगढ़ पहाड़ी के बैगा धुनेश्वर ने बताया कि जब भी कोयला खदान में ब्लास्टिंग किया जाता है तो पूरा पहाड़ हिल जाता है यहां तक की पहाड़ की चोटी पर बना प्राचीन राम मंदिर भी कांप जाता है. उन्होंने बताया कि पहाड़ में जगह-जगह बड़े-बड़े दरार हो गए हैं और अब यह दरार बढ़ते जा रहे हैं। इसकी वजह से अब लैंड स्लाइडिंग हो रही है बड़े-बड़े पत्थर टूट कर गिर रहे हैं और बड़े-बड़े पेड़ भी धराशाई हो रहे हैं. ऐसे हाल में कभी भी प्राचीन मंदिर तक पहुंचने वाला रास्ता बंद हो सकता है और अगर ऐसा हुआ तो फिर हमेशा के लिए प्राचीन राम मंदिर तक भक्त नहीं पहुंच पाएंगे.

पहाड़ को बचाने TS सिंहदेव ने की मांग
पूर्व उपमुख्यमंत्री TS सिंहदेव ने इस प्राचीन पहाड़ को बचाने के लिए अब एक समिति का स्थानीय लोगों के सहयोग से निर्माण किया है और यह समिति इस पहाड़ को बचाने के लिए हर स्तर पर प्रयास करेगी. सिंहदेव ने कहा है कि पहाड़ को नुकसान पहुंचे और वे चुप रहे, ऐसा नहीं होगा. उन्होंने कहा है कि खदान से पहाड़ी की दूरी वन विभाग ने पहले कम बताया था जबकि अब पहाड़ी की दूरी खदान से अधिक बताई गई है और इसी आधार पर खदान का एक्सटेंशन किया जा रहा है जिसका नुकसान देखने को मिल रहा है.

पूर्व उपमुख्यमंत्री ने कहा है कि ब्लास्टिंग की वजह से होने वाले लैंड स्लाइडिंग की वजह से पहाड़ टूट रहा है और ऐसे में जब प्राचीन राम मंदिर तक पहुंचने का रास्ता बंद हो जाएगा. उन्होंने आशंका जताते हुए कहा है कि इसी को देखते हुए संभवत पहाड़ के नीचे नया राम मंदिर बनवाया जा रहा है ताकि लोगों के आक्रोश को रोका जा सके.

पूर्व उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि क्षेत्रीय विधायक राजेश अग्रवाल और अब पर्यटन मंत्री ने रामगढ़ पहाड़ को नुकसान न पहुंचे इसके लिए पहल करने का भरोसा दिलाया है, यह अच्छी बात है और इसकी तारीफ की जानी चाहिए, उनसे उम्मीद है कि वह रामगढ़ पहाड़ को ब्लास्टिंग से बचने के लिए काम करेंगे.

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