घर लौट आ बेटा : मां की यह पुकार रह गई अधूरी; सात दिन बाद एनकाउंटर में ढेर हुआ कुख्यात माओवादी हिड़मा

बिगुल
आंध्रप्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू (ASR) ज़िले के मारेदुमिल्ली क्षेत्र में मंगलवार को सुरक्षा बलों ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए माओवादी संगठन को जोरदार नुकसान पहुंचाया। स्पेशल ग्रेहाउंड फोर्स के साथ हुई मुठभेड़ में 6 नक्सली मारे गए, जिनमें PLGA बटालियन नंबर-1 का प्रमुख और CPI (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सदस्य माडवी हिड़मा भी शामिल है। हिडमा की पत्नी के भी मुठभेड़ में ढेर होने की पुष्टि हुई है।
इस एनकाउंटर का एक विशेष पहलू यह है कि घटना से ठीक एक सप्ताह पहले छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा सुकमा जिले के पूवर्ती गांव पहुंचे थे। यही वह गांव है जहां हिड़मा का परिवार रहता है। गृह मंत्री विजय शर्मा ने हिड़मा की मां से मुलाकात कर उन्हें बेटे को समर्पण कर मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित करने को कहा था। लेकिन मात्र सात दिनों के भीतर वह मुठभेड़ में मारा गया।
हिड़मा की मां ने कही थी ये बात
उसकी मां ने कहा कि कहां पर हो कि आ जाओ कह रही हूं। नहीं आ रहा है तो मैं कैसे करूँ, कहीं आसपास रहने से ढूढ़ने भी जाती जंगल में। और क्या कहूं बेटा, आजा। नहीं आ रहा है तो मैं कैसे करूँ आ जा ही बोल रही हूं। घर आजा बोल रही हूं। ढूढ़ने जाती आसपास कहीं रहने से जाकर ले आती। कहां हो कि बेटा घर आ जाओ, कमाई करके खाएंगे, जियेंगे यहां। जनता के साथ जी लेना आ जाओ।
कौन था हिड़मा?
43 वर्षीय माडवी हिडमा, जिसे संगठन में संतोष नाम से भी जाना जाता था, देश के सबसे कुख्यात नक्सली नेताओं में से एक माना जाता था। CPI (माओवादी) की केंद्रीय समिति का सबसे युवा सदस्य, PLGA बटालियन नंबर-1 का कमांडर, बस्तर क्षेत्र से केंद्रीय नेतृत्व तक पहुँचा एकमात्र आदिवासी माओवादी, हिडमा अपने साथ लगभग 200 से 250 हथियारबंद नक्सलियों को लेकर चलता था और उसके ऊपर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। हिडमा पर कई बड़े और भीषण हमलों को अंजाम देने का आरोप था।



