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हिडमा के गांव पूवर्ती में लहराया तिरंगा, शिक्षा दूतों की पहल से बच्चों ने धूमधाम से मनाया गणतंत्र दिवस

बिगुल
छत्तीसगढ़ के नक्सलवाद प्रभावित गांवों में से एक और खुंखार नक्सली हिडमा के गांव में गणतंत्र दिवस के मौके पर तिरंगा फहराया गया. पूवर्ती के स्कूल परिसर में 26 जनवरी को हर्षोल्लास और देशभक्ति का माहौल रहा. कार्यक्रम की शुरुआत ध्वजारोहण के साथ हुई, जिसके बाद राष्ट्रगान गाया गया. इस मौके पर विद्यार्थियों और शिक्षकों ने देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रम प्रस्तुत किया.

हिडमा के गांव में शिक्षा दूतों की खास पहल
हिडमा के गांव में शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक पहल भी देखने को मिल रही है. यहां शिक्षा दूतों द्वारा संचालित स्कूल बच्चों के भविष्य को नई दिशा दे रहे हैं. दुर्गम और संसाधन-विहीन क्षेत्र होने के बावजूद स्थानीय युवाओं और स्वयंसेवकों के सहयोग से नियमित कक्षाएं चलाई जा रही हैं.

कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों पर आज़ादी बाद पहली बार जश्न
इस बार गणतंत्र दिवस के मौके पर कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों पर आज़ादी के बाद पहली बार ध्वजारोहण हुआ. ताड़पाला कैम्प पर सीआरपीएफ की 196 बटालियन व कोबरा की 204 बटालियन के जवानों ने झंडा फहराया. बता दें कि कल कर्रेगुट्टा पहाड़ पर आईईडी ब्लास्ट 10 घायल जवान हुए थे. इसके बावजूद जवानों का नहीं टूटा हौसला शान से नक्सलियों के किले पर तिरंगा फहराया.

इन 10 गांवों में पहली बार फहराया गया तिरंगा
पूवर्ती के अलावा जहां नक्सलियों ने सुकमा जिले के अंदरूनी इलाकों में दशकों तक बंदूकें थामकर हिंसा की औक संविधान को मानने से इंकार किया. अब वहीं पर हाथों में संविधान की किताब और गर्व से सिर उठाकर तिरंगे को सलामी देकर लोगों ने अपना पहला गणतंत्र दिवस मनाया. हिंसा के अंधकार के बाद अब इलाके में शांति, संविधान पर विश्वास और लोकतंत्र का उजास दिखाई देने लगा है. 4 दशकों से नक्सल उग्रवाद से प्रभावित रहे सुकमा में 10 ऐसे गांव थे, जहां अब तक राष्ट्रीय पर्व मनाना संभव नहीं था. 26 जनवरी 2026 को इन सभी गांवों में पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया गया.

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