रात के अंधेरे में काटे 21 सागौन के पेड़, लकड़ी नहीं ले जा सके आरोपी, निगरानी पर उठे सवाल

बिगुल
मरवाही वनमंडल के गौरेला वन परिक्षेत्र अंतर्गत पीपरखूटी गांव के जंगल में 21 नग हरे-भरे सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई का मामला सामने आने से वन विभाग में हड़कंप मच गया है। कटाई कक्ष क्रमांक 2305 में की गई है। यह क्षेत्र जोबाटोला से केंवची जाने वाले नेशनल हाईवे के किनारे स्थित है। सड़क से लगे जंगल में बड़ी संख्या में सागौन के पेड़ों की कटाई होने के बाद वन सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि अज्ञात लोगों ने रात के समय जंगल में पहुंचकर सागौन के पेड़ों को काट दिया। पेड़ों को काटने के बाद उन्हें मौके से बाहर ले जाने आरोपी सफल नहीं हो सके। सुबह मामले की जानकारी सामने आने के बाद वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी गई। इसके बाद वन अमला मौके पर पहुंचा और कटे हुए पेड़ों का निरीक्षण करते हुए जांच शुरू की। वन विभाग अब मौके पर मौजूद कटे हुए सागौन के पेड़ों की जब्ती की कार्रवाई कर रहा है। जब्त लकड़ी को मढ़ना डिपो भेजा जा रहा है। विभाग ने मामले में पीओआर दर्ज कर आरोपियों की पहचान और पतासाजी शुरू कर दी है। वन विभाग की जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई कब और किस तरह की गई।
मामले में संबंधित बीटगार्ड का बयान भी सामने आया है। बीटगार्ड ने इस घटना के पीछे अपने से रंजिश रखने वाले लोगों का हाथ होने की आशंका जताई है। ऐसे में पेड़ों की कटाई का मामला और अधिक संदिग्ध हो गया है। विभाग के सामने अब आरोपियों तक पहुंचने के साथ ही बीट क्षेत्र में तैनात कर्मचारियों की निगरानी और जिम्मेदारी तय करने की चुनौती भी है।
मरवाही वनमंडल के डीएफओ कुमार निशांत ने बताया कि मामले में पीओआर दर्ज कर लिया गया है और आरोपियों की पतासाजी की जा रही है। उन्होंने कहा कि संबंधित विभागीय कर्मचारियों को शोकॉज नोटिस जारी किए जा रहा हैं। कर्मचारियों के जवाब मिलने के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल वन विभाग द्वारा कटे हुए सागौन की जब्ती और डिपो भेजने की कार्रवाई जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि जंगल में पेड़ों की कटाई के पीछे कौन लोग शामिल थे और इस मामले में विभागीय स्तर पर किसी तरह की लापरवाही हुई है।



