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छत्तीसगढ़ में कर्मचारियों की हड़ताल से बैंकों पर लटका ताला, लेन-देन के लिए भटकते रहे ग्राहक

बिगुल
देश भर में बैंक कर्मचारी 5 डे वर्किंग की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं. इसका असर छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिल रहा है. प्रदेश भर में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से कामकाज और लेन-देन पर बुरा असर पड़ा है. दुर्ग जिले में भी बैंकिंग व्यवस्था पूरी तरह से ठप नजर आई. फाइव डे वर्किंग की मांग को लेकर सेंट्रल बैंक सहित विभिन्न बैंकों के कर्मचारी सामूहिक हड़ताल हैं. सेक्टर-1 स्थित स्टेट बैंक परिसर से बैंक कर्मचारियों ने रैली निकालते हुए जमकर हल्ला बोल प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की. कर्मचारियों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर फाइव डे वर्किंग लागू करो, बैंक कर्मियों को न्याय दो जैसे नारे लिखे हुए थे.

दुर्ग में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल के कारण लगभग सभी बैंक बंद रहे.

बैंक बंद होने की वजह से रोजमर्रा के काम से बैंक पहुंचे आम नागरिकों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा.
करोड़ों रुपए के चेक क्लियरेंस, लेन-देन और अन्य जरूरी बैंकिंग कार्य पूरी तरह प्रभावित रहे.
बैंक कर्मचारी आशा ने बताया कि कर्मचारियों की लंबे समय से फाइव डे बैंकिंग की मांग है.
यूनियन कई बार केंद्र सरकार के सामने यह मुद्दा उठा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया.
उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ते काम के बोझ के कारण कर्मचारियों पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है. मजबूरी में पूरे दिन का कार्य बहिष्कार किया गया है और यदि जरूरत पड़ी तो भविष्य में अनिश्चितकालीन हड़ताल भी की जा सकती है, जिस पर उच्च स्तर पर चर्चा जारी है.

बैंक पहुंची महिला ग्राहक हर्ष ताम्रकार ने बताया कि वे छुट्टी लेकर बैंक पहुंची थीं, लेकिन बैंक बंद देखकर निराश होकर वापस लौटना पड़ा. उन्होंने कहा कि वे एक टीचर हैं, बच्चों की पढ़ाई भी छूट गई और बैंक का काम भी नहीं हो सका. अब उन्हें दोबारा छुट्टी लेकर आना पड़ेगा. फाइव डे वर्किंग की मांग को लेकर शुरू हुई. यह हड़ताल अब जनजीवन को भी सीधे तौर पर प्रभावित कर रही है, जिससे आम लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं.

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