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NMDC का बड़ा कदम: दंतेवाड़ा के गांव बनेंगे ‘आत्मनिर्भर बस्तियां’, CMD ने दिया विकास का भरोसा

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दंतेवाड़ा के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के सुधार के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कंपनी NMDC ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है. कंपनी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (CMD) अमिताभ मुखर्जी ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक दर्जन से अधिक गांवों के सरपंचों और पंचायत प्रतिनिधियों से सीधे संवाद किया.

दंतेवाड़ा के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के सुधार के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कंपनी NMDC ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है. कंपनी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (CMD) अमिताभ मुखर्जी ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक दर्जन से अधिक गांवों के सरपंचों और पंचायत प्रतिनिधियों से सीधे संवाद किया. इस बैठक का उद्देश्य ग्रामीणों की समस्याओं को जमीनी स्तर पर समझना और उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाना था.

पानी, सड़क, बिजली और स्वास्थ्य पर फोकस
इस उच्च स्तरीय बैठक में पेयजल, सड़क संपर्क, स्वास्थ्य और बिजली जैसी जमीनी समस्याओं के त्वरित समाधान का भरोसा दिलाते हुए सीएमडी ने इन गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की प्रतिबद्धता जताई.

दंतेवाड़ा के एक दर्जन से अधिक गांवों के पंचायत प्रमुखों से मुलाकात की. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य स्थानीय ग्रामीणों की समस्याओं को सीधे सुनना और जल, बिजली व सड़क जैसे बुनियादी ढांचों में सुधार के लिए ठोस कदम उठाना था.

दंतेवाड़ा के गांव बनेंगे ‘आत्मनिर्भर बस्तियां’
ग्रामीणों को संबोधित करते हुए सीएमडी अमिताभ मुखर्जी ने कहा कि एनएमडीसी केवल एक खनन संगठन नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक बदलाव का एक जिम्मेदार भागीदार है. उन्होंने जोर देते हुए कहा – “हम इन गांवों को ‘आत्मनिर्भर बस्तियों’ में बदलने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करेंगे. समुदायों की प्रगति ही एनएमडीसी की वास्तविक सफलता है”

बैठक में निदेशक (कार्मिक) कृष्ण कुमार ठाकुर ने आश्वासन दिया कि स्थानीय समुदायों के साथ यह संवाद निरंतर जारी रहेगा. परियोजना के वरिष्ठ अधिकारियों (बचेली और किरंदुल कॉम्प्लेक्स) ने भी ग्रामीण विकास की पहलों को जल्द धरातल पर उतारने का भरोसा दिलाया.

1968 से बैलाडीला में कार्यरत एनएमडीसी के साथ हुए इस ‘फेस-टू-फेस’ संवाद से ग्रामीणों में खुशी की लहर है. स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों ने वरिष्ठ निदेशकों द्वारा उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनने के लिए आभार व्यक्त किया. 68 वर्षों के इस अटूट विश्वास को आगे बढ़ाते हुए एनएमडीसी अब आदिवासियों की मूलभूत समस्याओं को दूर करने के लिए अपनी सीएसआर (CSR) गतिविधियों को और अधिक तेज करेगा.

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