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विधानसभा की झलकियां : रमनसिंह का आदर्श, नेताम की परीक्षा, छुरी का कमाल, छा गई भावना, आइएएस बनाम आइएएस, विधायक अजय चंद्राकर, चरणदास महंत, भूपेश बघेल, राजेश मूणत, धरम कौशिक, ओपी चौधरी, केदार कश्यप, भावना बोहरा सुशांत शुक्ला की मजेदार टिप्पणियां सुनिए

डॉ. अनिल द्विवेदी

पांच दिनों तक चले छत्त्त्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का कल समापन हो गया। कांग्रेसी विपक्ष द्वारा विष्णु देव साय सरकार के खिलाफ यह पहला अविश्वास प्रस्ताव था। कांग्रेस का दावा था कि भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचार और बिगड़ती कानून व्यवस्था के कारण जनता का विश्वास खो दिया है। देर रात ढाई बजे तक चली बहस के बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने सदन में सरकार के बहुमत के आधार पर अपना फैसला सुनाया जिसमें विपक्ष का अविश्वास 36 कांग्रेस के मुकाबले 54 भाजपा वोटों से गिर गया। कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार पर सवालों की बौछार की तो मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने तर्कपूर्ण आकड़ों के साथ विपक्ष को आईना दिखाया और कहा कि झूठ बोलने पर पीएचडी होती तो कांग्रेस उसमें नम्बर वन होती। इस दौरान सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर नोंकझोंक और हंसी ठिठोली हुईं।

विधानसभा की मुख्य झलकियां :

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमनसिंह ने रात ढाई बजे अपना समापन भाषण दिया। वे चाहते तो बाकी सदस्यों की तरह एक घण्टे तक बोल सकते थे मगर सिर्फ 03 मिनट में अपना भाषण खत्म कर दिया। ऐसा करके उन्होंने जिस बुद्धिमत्ता और उदारता का परिचय दिया, वह सभी 89 विधायकों के लिए बड़ा संदेश था। दरअसल सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर कुछ सदस्य एक घण्टे तक बोलते रहे। रमनसिंह बीच बीच में टोकते रहे कि 40 सदस्यों को बोलना है इसलिए कम समय लीजिए लेकिन किसी ने कान ना धरे। अंतत: कुछ सदस्यों का नाम भाषण से काटना पड़ा। इसलिए रमनसिंह ने टाइम मेनेजमेंट का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अविश्वास प्रस्ताव पर मुख्य भाषण देते हुए कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार को जमकर घेरा। आंकड़ों और तथ्यों के आधार पर उन्होंने पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार की धज्जियां उड़ाकर रख दीं। इस पर बघेल बार—बार उनके शब्दों पर आपत्ति कर रहे थे। बघेल ने सीएम की ओर मुखातिब होते हुए कहा कि झूठ मत बोलिए और आरोप मत लगाइए। आपके आंकड़ें सही हैं तो इन्हें पटल पर रखिए। इस पर डॉ. रमनसिंह ने सख्त लहजे में कह दिया कि सीएम आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन रख रहे हैं, आरोप नही लगा रहे। प्रत्येक सदस्य को यह अधिकार है।

विधायक अजय चंद्राकर ने चुटकी ली कि डॉ. चरणदास महंत चुप बैठे हैं जबकि भूपेश बघेल बार—बार बोल रहे हैं। पता नही चल रहा कि नेता प्रतिपक्ष कौन हैं। चंद्राकर ने महंत की ओर मुखातिब होते हुए कहा : आप यशस्वी पिता की यशस्वी संतान हैं।

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत कर रहे थे तो महंत ने छुरी शब्द का जिक्र किया। इस पर विधायक अजय चंद्राकर ने उन्हें टोकते हुए कहा कि छुरी में धार रखिएगा, आगे काम आयेगा। इस पर महंत ने पलटवार करते हुए कहा कि मैं छुरी आगे से चलाता हूं, पीछे से नहीं।

आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ पी चौधरी का भाषण इतना प्रभावी रहा कि रमनसिंह ने भी उसकी तारीफ की. चौधरी ने बताया कि प्लास्टिक का रिसायकल करने, प्रदूषण रोकने के लिए हम कुछ नई तकनीक लेकर आ रहे हैं, इसका समर्थन रमनसिंह ने किया. चौधरी ने अजय चंद्राकर राजेश मूणत उमेश पटेल के सुझावों का स्वागत किया और आभार जताया. उन्होंने कहा कि इसके लिए सदस्यों के बीच एक प्रेजेंटशन दिया जाएगा।

विधायक भूपेश बघेल जब विपक्ष की ओर से मुख्य भाषण दे रहे थे तो अनुपूरक बजट पर टिप्पणी कर दी। इस पर वित्त मंत्री ओ पी चौधरी ने खड़े होकर सफाई दी। चौधरी ने कहा कि अनुपूरक बजट का आना सरकार की वित्तीय नीति पर सवाल खड़े करता है। पिछली बार हमने बजट इस तरह प्रस्तुत किया कि इस बार अनुपूरक लाने की जरूरत ही नही पड़ी। यह हमारे कुशल वित्तीय प्रबंधन को दर्शाता है। इस पर भूपेश बघेल ने कहा कि अरे वाह, 15 साल डॉ. रमन सिंह सरकार ने अनुपूरक बजट पेश किया, पांच साल में हमारी सरकार में भी पेश हुआ, विष्णु देव साय सरकार में भी अनुपूरक बजट पेश हुआ। तो क्या मतलब निकाला जाए। हम सबको वित्तीय प्रबंधन नही आता है।

कृषि मंत्री रामविचार नेताम की परीक्षा सदन में हो गईं। भूपेश बघेल जब सरकार पर आरोप लगा रहे थे तो नेताम ने उन्हें कृषि पर अपडेट करना चाहा तो बघेल ने पूछ लिया कि अच्छा बताइए कि खेती का उत्पादन बढ़ाने के लिए यूरिया और उर्वरक मिलाकर कितना औसत खेत में डाला जाता है, इस पर नेताम निरूत्तर हो गए लेकिन सदन में ठहाके लग पड़े.

विधायक अजय चंद्राकर ने भूपेश बघेल के भाषण पर कई बार टोकाटाकी की। बघेल ने सरकार पर योजनाओं का नाम बदलने का आरोप लगाया तो चंद्राकर ने दावा किया कि आपकी सरकार ने 1000 योजनाओं के नाम बदले। बघेल ने कहा कि आप इसकी सूची पटल पर रख दो, मैं आरोप स्वीकार कर लूंगा। इस पर चंद्राकर बोले कि मैंने कागजात उमेश पटेल को दे दिए है। तो पटेल ने हंसते हुए सदन को बताया कि चंद्राकर ने जो कागजात मुझे दिए हैं, वे 1997 और 1937 कानून के हैं। इस पर सदन में ठहाके लग गए।

विधायक अजय चंद्राकर ने सरकार की ओर से अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की शुरूआत की। उन्होंने प्रभावी भाषण दिया। एक जगह चुटकी लेते हुए चंद्राकर ने कहा कि संगीता सिन्हा को भूपेश बघेल ने महिला कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनवा दिया, जबकि टी एस सिंहदेव तो छन्नी साहू को बनवाना चाहते थे। रहे चरणदास महंत जी तो उनकी सुनी ही नही जाती। उनकी खुद की सरकार में मात्र एक मांग पूरी हुई और वह थी सक्ती को जिला बनाने की।

सदन में भावना’ शब्द को सैकड़ों बार इस्तेमाल हुआ। भाजपा विधायक धरम लाल कौशिक ने अपने भाषण में कहा कि मैं आपकी भावनाओं का सम्मान करता हूं तो कांग्रेस के रामकुमार यादव ने कहा कि भावना बोहरा आपके पीछे बैठी हैं। कौशिक बोले कि मैं भावना का सम्मान करता हूं। इस पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमनसिंह ने ठहाका लगाया। सदस्यों ने जब जब भावना’ शब्द का जिक्र किया तो विधायक भावना बोहरा मुस्कुराती रहीं। अपने आकर्षक अंदाज और पहनावा के चलते सदन में आकर्षण का केन्द्र बनी रहीं।

कांग्रेस के विधायक व्यास कश्यप ने अपना भाषण देते हुए आरोप लगाया कि जिला कलेक्टर विकास निधि बांटने में भेदभाव करते हैं। इस पर भाजपा विधायक धर्मजीत सिंह ने कलेक्टर का बचाव करते हुए कहा कि कोई भेदभाव नहीं करते. उन्होंने सभी विधायकों को राशि बांटी है। आपका मामला भी देख लेंगे।

विधायक राजेश मूणत ने विधानसभा में जो भाषण दिया, वह बेहद चर्चा में रहा। मूणत ने सिलसिलेवार कांग्रेस के आरोपों की धज्जियां उड़ाईं। कहा कि कांग्रेस सरकार में हर ठेके के दाम थे। आइएएसों ने गजब ढाया. 50.25.75 का रेट था. बोलो तो आइएएसों के नाम ले लूं. यहां के आइएएसों ने झारखण्ड जाकर ऐसी शराब नीति बनवाई कि वहां के आइएएस अंदर हो गए…बघेल सरकार ने चार महीने में छह बार ओलंपिक करा दिया, गजब है…9 करोड़ का बोरे बासी खा गए. इस पर एक सदस्य ने टिप्पणी कि वो भी 2000 रूपये प्लेट का बोरे बासी. मूणत जब बोल रहे थे तो विधायक राम कुमार यादव ने कांग्रेस की ओर से मोर्चा संभाल रखा था। वे जब भी बोलने को खड़े होते तो मूणत हंसते हुए पूछते कि नोट गिनने वाला वीडियो कहां है..कितना खाए थे ये तो बता दो. इस पर यादव ने तगड़ा जवाब दिया कि राम मंदिर का चंदा कितना खाए हो।

वन मंत्री केदार कश्यप ने हसदेव मामले पर कांग्रेस की धज्जियां उड़ाई. कागजात के साथ बताया कि तत्कालीन केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने हसदेव का कोल ब्लॉक बांटा. उन्होंने वन सलाहकार समिति की अनुशंसा को किनारे करके कोल ब्लॉक बांट दिया। और आप दोष हमें यानि भाजपा सरकार को देते हैं. इस पर कांग्रेस को सांप सूंघ गया।

विधायक कवासी लखमा बोलने के लिए खड़े हुए तो विधायक अजय चंद्राकर और राजेश मूणत ने उन्हें घेरा। बोले कि आप जुंआ खिलवाते हो, यह आरोप पत्र में लिखा है। मैं बोला था कि शराब विभाग छोड़ दो, अगर मेरी बात मान गए होते तो यात्रा नहीं होती. इस पर कवासी सिर्फ मुस्कुराते रहे।

युवा विधायक सुशांत शुक्ला भाजपा विधायक दल के सचेतक हैं, उनकी परफारमेंस भी देखने लायक रही. नकटी मामले पर पर विपक्ष सरकार पर भारी पड़ रहा था तो शुक्ला ने बिलासपुर चांटापारा का मामला उठा दिया. बोले जब आपकी सरकार गरीबों के मकान गिरा रही थी तब चुप क्यों बैठे थे। इस पर विपक्ष को सांप सूंघ गया। सुशांत ने एक दर्जन से अधिक बार खड़े होकर कांग्रेस विधायकों को परेशानी में डाला.

विधायक संगीता सिन्हा बोलने के लिए खड़ी हुईं तो भाजपा विधायक भावना बोहरा ने उन्हें आईना दिखाया। सुशांत के साथ सलाह करते हुए भावना ने महिलाओं के मुददे पर जमकर क्लास ली. विधायक पुरंदर मिश्रा पूरे सत्र में शांत बैठे रहे। इस पर कटाक्ष हुआ कि महाराज सदन के बाहर बयानों से कांग्रेस को घेरते हैं, सदन के अंदर नही. विधायक पुन्नूलाल मोहिले, भैयालाल रजवाड़े भी शांत ही बैठे रहे।

चमन में इख़्तिलात-ए-रंग-ओ-बू से बात बनती है
हम ही हम हैं तो क्या हम हैं तुम ही तुम हो तो क्या तुम हो

डॉ. अनिल द्विवेदी, वरिष्ठ पत्रकार.

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