विशेष रपट : स्मार्ट मीटर ने बिगाड़ा लाखों परिवारों का बजट? बढ़ते बिजली बिलों से उपभोक्ताओं में हड़कंप, कांग्रेस ने उठाए बड़े सवाल, भाजपा बोली- इसकी शुरुआत कांग्रेस ने की

बिगुल
छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर अब सिर्फ बिजली मापने का उपकरण नहीं, बल्कि सियासत का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है। प्रदेशभर से बढ़े हुए बिजली बिलों की शिकायतें सामने आ रही हैं।आम उपभोक्ता सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल कई गुना क्यों बढ़ गया? दूसरी तरफ कांग्रेस इसे जनता की जेब पर डाका बता रही है, जबकि बीजेपी दावा कर रही है कि पूरी योजना पिछली कांग्रेस सरकार की देन है यानी जनता बढ़े हुए बिल से परेशान है और सत्ता-विपक्ष एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल क्या स्मार्ट मीटर वास्तव में ज्यादा बिल भेज रहा है या फिर इसके पीछे कोई और वजह है?
स्मार्ट मीटर को लेकर गहतरा जा रहा विवाद
छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर को लेकर विवाद हर दिन गहराता जा रहा है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहां उपभोक्ता दावा कर रहे हैं कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनके बिजली बिल कई गुना बढ़ गए हैं। Smart Meter News लोगों का कहना है कि पहले जहां हजार से डेढ़ हजार रुपये तक बिल आता था अब वही बिल पांच, छह और सात हजार रुपये तक पहुंच रहा है। यही वजह है कि स्मार्ट मीटर अब आम आदमी के लिए सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
जून 2026 में 7550 रुपये पहुंच गया बिल
रायपुर के महावीर नगर में रहने वाली दमयंती तिवारी का जुलाई 2025 में उनके घर का बिजली बिल 1360 रुपये आया था लेकिन जून 2026 में यही बिल बढ़कर 7550 रुपये पहुंच गया। ऐसे ही कई उपभोक्ता दावा कर रहे हैं कि पिछले साल की तुलना में उनका बिजली बिल दोगुना या उससे भी ज्यादा हो गया है।
“कांग्रेस सरकार ने की थी स्मार्ट मीटर योजना की शुरुआत “
बढ़े हुए बिजली बिलों को लेकर कांग्रेस ने इसे बड़ा जन मुद्दा बना दिया है। राजधानी रायपुर समेत कई जगहों पर कांग्रेस कार्यकर्ता घर-घर पहुंचकर स्मार्ट मीटर हटाने के लिए आवेदन भरवा रहे हैं वही बीजेपी ने पूरे मामले की जिम्मेदारी पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर डाल दी है। बीजेपी विधायक पुरंदर मिश्रा का कहना है कि स्मार्ट मीटर योजना की शुरुआत कांग्रेस सरकार के दौरान हुई थी। 2021 में योजना पर चर्चा हुई 2022 में टेंडर निकाले गए और जनवरी 2023 में एग्रीमेंट हुआ।
आज जनता और मौजूदा सरकार को भुगतना पड़ता है अंजाम
उनका आरोप है कि कांग्रेस सरकार ने बिजली व्यवस्था का काम निजी कंपनियों को सौंपकर प्रदेश को मुश्किल में डाल दिया जिसका खामियाजा आज जनता और मौजूदा सरकार दोनों को भुगतना पड़ रहा है। बीजेपी के आरोपों पर कांग्रेस ने भी पलटवार किया है। पूर्व विधायक विकास उपाध्याय का कहना है कि अगर स्मार्ट मीटर गलत तरीके से बिजली बिल बढ़ा रहे हैं तो इसकी जिम्मेदारी वर्तमान सरकार से कोई नहीं छीन सकता क्योंकि मीटर बिजली विभाग ही लगा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन घरों में पहले 500 रुपये तक बिजली बिल आता था। अब वहां पांच हजार रुपये तक के बिल भेजे जा रहे हैं।
भरोसे की लड़ाई बन गया है स्मार्ट मीटर
कांग्रेस का कहना है कि सरकार जनता को राहत देने के बजाय सिर्फ जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है। छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर अब तकनीक से ज्यादा भरोसे की लड़ाई बन गया है। एक तरफ जनता बढ़े हुए बिजली बिलों का हिसाब मांग रही है। दूसरी तरफ सत्ता और विपक्ष इसकी राजनीतिक जिम्मेदारी तय करने में जुटे हैं। लेकिन जब तक बढ़े हुए बिजली बिलों की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच नहीं होती तब तक यह विवाद थमता हुआ नजर नहीं आ रहा।


