Blog

आवासीय संस्थानों पर उठे सवाल, कन्या छात्रावास में अधीक्षिका पर प्रताड़ना का आरोप, NSUI ने दी चेतावनी

बिगुल
कोरबा के पोड़ी उपरोड़ा स्थित 100 सीटर कन्या छात्रावास की छात्राओं ने अधीक्षिका पर मानसिक-शारीरिक प्रताड़ना, जबरन मालिश और घरेलू काम कराने के आरोप लगाए हैं। एनएसयूआई ने जांच और कार्रवाई की मांग करते हुए प्रशासन को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है।

कोरबा जिले में आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में अनियमितताओं के खिलाफ विरोध लगातार बढ़ रहा है। पहले छुरी स्थित एकलव्य आवासीय विद्यालय के बच्चों ने 3 अगस्त को एनएच-130 पर चक्काजाम कर प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। अब पोड़ी उपरोड़ा स्थित 100 सीटर कन्या छात्रावास की छात्राओं ने भी मोर्चा खोल दिया है।

छात्राओं ने छात्रावास अधीक्षिका पर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना करने का आरोप लगाया है। छात्राओं का कहना है कि अधीक्षिका उनसे जबरन मालिश कराती हैं और मना करने पर धमकी दी जाती है। इसके अलावा छात्राओं से घरेलू और निजी काम भी करवाए जाने का आरोप है।

भोजन की गुणवत्ता पर भी उठे सवाल
छात्राओं ने छात्रावास में भोजन व्यवस्था में भी भारी अनियमितता का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मेन्यू के अनुसार खाना नहीं दिया जाता और भोजन की गुणवत्ता भी बेहद खराब है। खाना मांगने पर अधीक्षिका द्वारा अमानवीय भाषा का इस्तेमाल किए जाने का आरोप छात्राओं ने लगाया है।

एनएसयूआई ने छात्राओं से की मुलाकात
मामला सामने आने के बाद एनएसयूआई की टीम पोड़ी उपरोड़ा पहुंची। टीम ने छात्राओं से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। NSUI नेताओं ने कहा कि छात्राओं की शिकायतें बेहद गंभीर हैं और प्रशासन का रवैया उदासीन नजर आ रहा है। एनएसयूआई जिला सचिव इमरान अली ने बताया कि छात्राओं ने पहले भी संबंधित विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों को शिकायत दी थी और प्रदर्शन भी किया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि गंभीर आरोपों के बावजूद जिला प्रशासन मामले को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रहा है।

15 दिन का अल्टीमेटम, 16वें दिन चक्काजाम की चेतावनी
एनएसयूआई और छात्र संगठनों ने प्रशासन को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। इमरान अली ने कहा कि यदि 15 दिनों के भीतर छात्राओं की सभी मांगें पूरी नहीं की गईं और दोषी अधीक्षिका के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो 16वें दिन उग्र चक्काजाम किया जाएगा। छात्राओं में भी भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि वे पढ़ाई के लिए छात्रावास में आई हैं, प्रताड़ना सहने के लिए नहीं।

The Bigul

हमारा आग्रह : एक निष्पक्ष, स्वतंत्र, साहसी और सवाल पूछती पत्रकारिता के लिए हम आपके सहयोग के हकदार हैं. कृपया हमारी आर्थिक मदद करें. आपका सहयोग 'द बिगुल' के लिए संजीवनी साबित होगा.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button