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द ओरियेंटल इंश्योरेंस कंपनी को मृत महिला के परिजनों को देना होगा 5 लाख का मुआवजा

बिगुल
मुख्य मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, रायपुर ने सड़क हादसे में मृत पदमा बाई के तीन वारिसों के पक्ष में 5 लाख रुपए क्षतिपूर्ति का आदेश दिया है. अधिकरण ने मुआवजा राशि पर 3 जुलाई 2025 से भुगतान की तारीख तक 7 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देने का भी निर्देश दिया है. यह अधिनिर्णय 17 अगस्त 2026 को पीठासीन अधिकारी बलराम प्रसाद वर्मा ने सुनाया.

मामला दावा प्रकरण क्रमांक 784/2025 से संबंधित है. प्रकरण में कीर्ति बघेल, धीरती बाई दिवाकर और प्रीति मिरी ने पदमा बाई की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद क्षतिपूर्ति के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था. मामले में ट्रक क्रमांक CG-04-MN-9688 के चालक दिलशाद अहमद, वाहन मालिक मोहम्मद जियाउद्दीन और बीमा कंपनी द ओरियेंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को अनावेदक बनाया गया था.
खरोरा क्षेत्र में हुआ था हादसा

दावा प्रकरण के अनुसार 22 जनवरी 2025 की शाम करीब 5:30 बजे ग्राम कठिया नंबर-1 के दुर्गा चौक के पास सड़क किनारे खड़ी पदमा बाई को उक्त ट्रक ने टक्कर मार दी थी. हादसे में वह ट्रक के पहिये के नीचे आ गई और उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई. घटना के संबंध में थाना खरोरा में अपराध क्रमांक 46/2025 दर्ज किया गया था. पुलिस ने जांच के बाद अभियोग-पत्र न्यायालय में पेश किया. मृतका की पुत्री धीरती बाई ने अधिकरण में बयान दिया कि हादसा ट्रक के उपयोग और संचालन के दौरान हुआ. हालांकि वह स्वयं दुर्घटना की प्रत्यक्षदर्शी नहीं थी, लेकिन अधिकरण ने प्राथमिकी, मर्ग संबंधी दस्तावेज, पंचनामा, शव परीक्षण रिपोर्ट, जब्ती और गिरफ्तारी संबंधी दस्तावेजों सहित पुलिस रिकॉर्ड का परीक्षण किया. इन दस्तावेजों के आधार पर अधिकरण ने माना कि पदमा बाई की मृत्यु ट्रक के चालन के दौरान हुई दुर्घटना के कारण हुई थी.
बीमा कंपनी चालक के लाइसेंस उल्लंघन को साबित नहीं कर सकी

बीमा कंपनी की ओर से यह तर्क दिया गया था कि दुर्घटना के समय चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था और बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन हुआ था. अधिकरण ने कहा कि इस दावे को साबित करने का भार बीमा कंपनी पर था, लेकिन कंपनी की ओर से इस संबंध में कोई पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया. इसलिए पॉलिसी की शर्तों के उल्लंघन का आरोप प्रमाणित नहीं हुआ.
तीनों बेटियां वैधानिक वारिस, 5 लाख रुपए की हकदार

अधिकरण ने पाया कि तीनों आवेदिकाएं मृतका पदमा बाई की बेटियां और वैधानिक उत्तराधिकारी हैं. हालांकि वे अपनी मां के साथ नहीं रहती थीं और उनके द्वारा मां पर आश्रित होने की बात भी स्वीकार नहीं की गई, फिर भी वैधानिक उत्तराधिकारी होने के कारण वे प्रतिकर पाने की अधिकारी हैं. अधिकरण ने मोटर यान अधिनियम की धारा 164 के प्रावधानों के आधार पर मृत्यु के मामले में 5 लाख रुपये की निर्धारित क्षतिपूर्ति को स्वीकार किया. तीनों आवेदिकाओं को कुल 5 लाख रुपए तथा 3 जुलाई 2025 से भुगतान की तारीख तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया गया.
30 दिन के भीतर भुगतान का आदेश

अधिकरण ने अनावेदकों को अधिनिर्णय की तारीख 17 अगस्त 2026 से 30 दिनों के भीतर क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है. बीमा कंपनी को ब्याज सहित पूरी राशि अधिकरण के बैंक खाते में जमा करनी होगी. इसके बाद तीनों आवेदिकाओं को राशि बराबर-बराबर हिस्से में दी जाएगी.

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