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खुलासा : पीएम आवास योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा, बिचौलियों ने हड़प ली राशि, पहाड़ी कोरवा परिवार झोपड़ी में रहने को मजबूर

सरगुजा जिले के लखनपुर जनपद क्षेत्र के ग्राम पंचायत रेमला में सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत सामने आई है. दरअसल, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत होने के बावजूद कई पहाड़ी कोरवा परिवार आज भी अधूरे मकानों और कच्ची झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि बिचौलियों ने उनके बैंक पासबुक अपने पास रखकर आवास योजना की राशि खातों से निकलवा ली, लेकिन इसके बाद भी मकानों का निर्माण पूरा नहीं कराया गया.

ग्रामीणों ने क्या बताया ?

ग्रामीणों के मुताबिक, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उनके नाम पर मकान स्वीकृत हुए थे. बिचौलियों ने बैंक खाते से राशि निकलवाने के बाद मकान बनाकर देने का भरोसा दिलाया, लेकिन कई आवास आज भी आधे-अधूरे पड़े हैं. लगातार हो रही बारिश के बीच परिवारों को पुराने कच्चे मकानों और घास-फूस की झोपड़ियों में रहना पड़ रहा है.

बारिश के कारण कच्चे मकानों की दीवारें दरक रही हैं. ग्रामीणों का कहना है कि तेज बारिश के दौरान घरों में पानी घुस जाता है और रातभर जागकर गुजारनी पड़ती है. ऐसे में परिवारों पर मकान गिरने और हादसे का खतरा भी बना हुआ है.
नल लगा पर पानी नहीं पहुंचा

ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या केवल प्रधानमंत्री आवास योजना तक सीमित नहीं है. गांव में जल जीवन मिशन के तहत नल लगाए गए हैं, लेकिन कई घरों तक अब तक पानी नहीं पहुंचा है. वहीं, स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए गए शौचालयों की स्थिति भी सवालों के घेरे में है. ग्रामीणों के अनुसार, शौचालयों का निर्माण या तो अधूरा है या उपयोग के लायक नहीं है, जिसके कारण उन्हें खुले में शौच जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है.

योजनाओं के लाभ से वंचित परिवार

ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में सरकारी योजनाओं के नाम पर बिचौलियों का प्रभाव है और शिकायतों के बावजूद जिम्मेदारों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है. उनका कहना है कि जिन योजनाओं का उद्देश्य आदिवासी परिवारों का जीवन बेहतर बनाना है, उन्हीं योजनाओं का लाभ उन्हें जमीन पर नहीं मिल पा रहा है.

बारिश में चूल्हा जलाना भी मुश्किल

सबसे गंभीर स्थिति उन परिवारों की है जो अभी भी घास-फूस और कच्चे मकानों में रह रहे हैं. तेज बारिश के दौरान घर के अंदर पानी भर जाने से लकड़ियां भीग जाती हैं, जिससे चूल्हा जलाना मुश्किल हो जाता है. ग्रामीणों के अनुसार, उज्ज्वला योजना का लाभ भी कई परिवारों तक नहीं पहुंचा है.

ऐसे में बारिश के दिनों में भोजन बनाने के लिए भी उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ती है. ग्रामीणों ने सरकारी योजनाओं में कथित गड़बड़ी की जांच कराने, अधूरे आवासों का निर्माण पूरा कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

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