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छत्तीसगढ़ में ‘हनुमान अंश’ टैक्स फ्री, सीएम साय का बड़ा ऐलान, आज मंत्रियों के साथ देखी मूवी

बिगुल
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के जोरा मॉल पहुंचे. वे यहां हनुमान अंश फिल्म देखने पहुंचे. मुख्यमंत्री के साथ कैबिनेट मंत्री दयालदास बघेल और मंत्री रामविचार नेताम भी जोरा मॉल पहुंचे. बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ इस फिल्म को देखेंगे.

इस स्पेशल स्क्रीनिंग में मुख्यमंत्री के साथ विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह, राज्यपाल रमेन डेका और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल रमेश बैस भी जोरा मॉल पहुंचे. इसके अलावा कैबिनेट मंत्री दयालदास बघेल, रामविचार नेताम, लक्ष्मी राजवाड़े, टंक राम वर्मा, श्याम बिहारी जायसवाल, बृजमोहन अग्रवाल और महापौर मीनल चौबे भी फिल्म देखने पहुंची.
छत्तीसगढ़ में टैक्स फ्री हुई हनुमान अंश फिल्म

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने फिल्म को लेकर बड़ा ऐलान किया है. सीएम साय ने ‘हनुमान अंश’ फिल्म को छत्तीसगढ़ में टैक्स फ्री करने का ऐलान किया है. अब प्रदेश में यह फिल्म टैक्स फ्री हो गई है, जिससे दर्शकों को टिकट पर राहत मिलेगी और ज्यादा से ज्यादा लोग इस फिल्म को देख सकेंगे.
बॉक्स ऑफिस पर छाई मूवी

नीम करोली बाबा के जीवन और आध्यात्मिक संदेशों से प्रेरित फिल्म Hanuman Ansh ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता की एक नई और अद्भुत इबारत लिख दी है. पहले दिन महज 10 लाख रुपये की सुस्त शुरुआत करने वाली इस फिल्म ने केवल सकारात्मक वर्ड-ऑफ-माउथ और दर्शकों के भारी समर्थन के दम पर भारत में 81.41 करोड़ रुपये नेट (96.03 करोड़ रुपये ग्रॉस) का रिकॉर्ड आंकड़ा पार कर लिया है.

इस ऐतिहासिक व्यावसायिक सफलता के बीच, फिल्म के लेखक, निर्देशक और निर्माता डॉ. विशाल चतुर्वेदी (Dr Vishal Chaturvedi) ने एक इंटरव्यू में उस संघर्ष को याद किया है जब इस कहानी को एक प्रमुख ओटीटी प्लेटफॉर्म द्वारा अपमानजनक तरीके से खारिज कर दिया गया था. विशाल ने अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया, ‘जब मैं अपनी कहानी पिच करने एक बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म के पास गया और महाराज जी (नीम करोली बाबा) की जीवन गाथा सुनाई, तो मैं इतना भावुक हो गया कि मेरी आंखों से आंसू बह निकले और मैं रो पड़ा. लेकिन इसके बावजूद उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया.’
उनके रवैये और भाषा से दुख हुआ

विशाल ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के रुख पर बेबाक बात रखते हुए आगे कहा, ‘हम फिल्म निर्माता हैं और अपने करियर में हजारों बार रिजेक्शन देखते हैं. यदि कहानी पसंद न आए, तो सम्मानपूर्वक ना कहा जा सकता है. लेकिन जिस भाषा का इस्तेमाल किया गया और जिस तरह से फिल्म को ठुकराया गया, वह अपमानजनक था. इससे साफ पता चलता है कि उनके दिमाग में भारतीय संस्कृति और कहानियों को लेकर एक गलत नैरेटिव बैठा हुआ है. उसी वक्त मेरा संकल्प मजबूत हुआ कि इस गलत नैरेटिव को तोड़ना बेहद जरूरी है.’

ओटीटी प्लेटफॉर्म्स द्वारा ठुकराए जाने के बावजूद, भारतीय दर्शकों ने इस आध्यात्मिक सिनेमा को जिस तरह से अपनाया है, उसने निर्देशक के विश्वास को पूरी तरह सच साबित कर दिया है. फिल्म की इस अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कामयाबी को देखते हुए अब मेकर्स ने इसके सीक्वल की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं.

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