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ब्रिगेडियर बंसत कुमार पोनवार का निधन, 37,000 जवानों को दी थी गुरिल्ला लड़ाई की ट्रेनिंग

बिगुल
छ्त्तीसगढ़ में जवानों को नक्सलवाद के खिलाफ गुरिल्ला लड़ाई की ट्रेनिंग देने वाले प्रशिक्षक ब्रिगेडियर बसंत कुमार पोनवार का सोमवार (27 जुलाई) रात निधन हो गया. कांकेर स्थित जंगल वारफेयर कॉलेज के लंबे वक्त तक प्रमुख रहे. ब्रिगेडियर ने करीब 37,000 जवानों को गुरिल्ला लड़ाई की ट्रेनिंग दी. नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में इन्हीं जवानों का रहा सबसे बड़ा योगदान रहा है.

कॉलेज में दी गई श्रद्धांजलि
आर्मी से रिटायरमेंट के बाद स्वर्गीय ब्रिगेडियर बसंत कुमार पोनवार ने 1 अप्रैल 2005 को जंगल वारफेयर कॉलेज कांकेर का जिम्मा संभाला था. इसी कॉलेज में पोनवार को श्रद्धाजंलि दी गई. इस कार्यक्रम में कई लोग शामिल हुए.

असुविधा के बाद भी कमान संभाली
एक समय था, जब छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र नक्सल हिंसा से बुरी तरह प्रभावित था. ऐसे कठिन दौर में राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ के जवानों को गोरिल्ला युद्ध के प्रशिक्षण हेतु अनुभवी सैन्य अधिकारी बसंत कुमार पोनवार को छत्तीसगढ़ में आमंत्रित किया. नक्सलवाद खत्म करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी. 1 अप्रैल 2005 को जब उन्होंने आर्मी से रिटायरमेंट होकर जंगल वार कॉलेज कांकेर में कार्यभार संभाला. उस समय जवानों के प्रशिक्षण के लिए आवश्यक संसाधन एवं आधारभूत सुविधा का अभाव था लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी दूरदर्शिता अनुशासन और अथक परिश्रम से प्रशिक्षण हेतु आवश्यक संसाधन का 3 महीने में सफलतापूर्वक निर्माण कर अगस्त 2005 में प्रथम कोर्स का प्रशिक्षण प्रारंभ कर दिया.

शांति स्थापित करने में अहम योगदान
उनके नेतृत्व में आज तक छत्तीसगढ़ पुलिस , नक्सल प्रभावित राज्य, बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, आरपीएफ, एनएसजी और इंडियन आर्मी के कुल 44000 जवानों को नक्सली युद्ध कला गोरिल्ला वारफेयर में प्रशिक्षित किया गया. इस प्रशिक्षण से सुरक्षा बलों की क्षमता आत्मविश्वास एवं नक्सल अभियान चलाने की दक्षता को ऊंचाइयों तक पहुंचाया गया. ब्रिगेडियर ने 1971 में भारत पाकिस्तान की लड़ाई में भाग लेकर अपना बहुमूल्य योगदान दिया और बांग्लादेश को आजाद करवाया.

ब्रिगेडियर का योगदान एक प्रशिक्षण के रूप में नहीं बल्कि एक मार्गदर्शक के रूप में भी याद किया जाएगा जिन्होंने कठिन परिश्रम में सुरक्षा बलों को नई दिशा नई शक्ति प्रदान की और जवानों में आत्मविश्वास पैदा किया है. राष्ट्र की सुरक्षा वह छत्तीसगढ़ में शांति की स्थापना एवं नक्सलवाद के उन्मूलन के लिए किए गए प्रयास सदैव हमारे लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे.

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