मध्यप्रदेश

फर्जी वेबसाइट व काल सेंटर बनाकर ठगी, भोपाल में सेवानिवृत्त शासकीय कर्मी से ऐंठ लिए 1.35 करोड़

बिगुल

भोपाल :- क्राइम ब्रांच ने विदेश और एमएनसी कंपनी में नौकरी दिलाने ने नाम पर ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश कर दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरोह ने भोपाल के एक व्यक्ति से 1.35 करोड़ की ठगी की है। इसके अलावा छह माह में मप्र, उप्र और राजस्थान के करीब 96 लोगों को अपना शिकार बनाया है। यह गिरोह फर्जी वेबसाइट बनाकर उस पर लोगों से रजिस्ट्रेशन करवाता था और बाद में नौकरी दिलाने के नाम पर उनसे रुपए जमा करवाता था।

आरोपितों ने दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा में फर्जीवाड़े के लिए बाकायदा काल सेंटर बना रखे थे। गिरोह यहां एक बार पंजीयन कराने वाले या वेबसाइट पर सर्च करने वाले लोगों के नंबर हासिल कर उन्हें लालच देकर जाल में फंसाता था। इनके जाल में भोपाल के एक 64 वर्षीय बुजुर्ग भी आ गए थे। गिरोह ने विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर इनसे कई बार में 1.35 करोड़ रुपए ठग लिए। 64 वर्षीय बुजुर्ग सरकारी नौकरी से रिटायर होने के बाद मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी तलाश रहे थे। ऑनलाइन सर्चिंग के दौरान इनका मोबाइल नंबर गिरोह तक पहुंच गया। उनके झांसे में आकर इन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद मिली रकम और शासकीय सेवा में सेवारत पत्नी का बैंक अकाउंट भी खाली कर दिया।

आरोपित पुराने रुपये वापस करने के नाम पर इनसे रुपये मांगता जा रहा था और ये उसे देते जा रहे थे। क्राइम ब्रांच ने गिरोह के दो सदस्य वर्धमान पश्चिम बंगाल निवासी देवजीत दत्ता (26) और जनकपुर नेपाल निवासी दिवाकर मिश्रा (34) को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, बैंक खाते और मोबाइल लोकेशन के आधार पर टीम इनका पीछा करते हुए दिल्ली तक पहुंची थी। देवजीत फोन पर रजिस्ट्रेशन कराता था और नेपाली नागरिक काल सेंटर चलाता था। पुलिस ने बताया, 12वीं पास दिवाकर इस काम में माहिर हो चुका था।

डीसीपी श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने बताया कि आरोपितों ने नौकरी का झांसा देने वाली वेबसाइट को इस तरह डिजाइन किया था कि उसमें पेमेंट गेटवे हो। इस कारण लोग वेबसाइट पर विश्वास भी कर लेते थे। आरोपित अपनी पहचान छिपाने और पुलिस से बचने के लिये फर्जी नंबरों से फोन करते थे। 10 बार फोन करने के बाद सिम तोड़ देते थे। वेबसाइट के पेमेंट गेटवे में भी फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल करते थे।

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