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पंडरिया की रिपोर्ट : अस्पताल जाने के लिए कीचड़ भरा रास्ता, कांग्रेस विधायक ममता चंद्राकर का गांव बहा रहा बदहाली के आंसू, सड़क में गड्ढे या गड्ढे में सड़क ?

बिगुल
रायपुर. कवर्धा जिले के पंडरिया विधानसभा के सुकली गोविंद गांव आज भी मूलभूत समस्याओं से जूझता नजर आ रहा है. सड़क, नाली, पंचायत भवन, स्कूल, हॉस्पिटल जाने के लिए सड़क नहीं है. बरसात के दिनों में गांव के नालियों में 2 फीट पानी भरा रहता है, जिसके चलते ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है.

कहने को सुकली गोविंद गांव पंडरिया विधायक ममता चंद्राकर का गृह ग्राम है, लेकिन यहां विकास कहीं खो गया है, जिसकी लोगों को आज भी तलाश है. ग्राम पंचायत सुकली गोविंद के सरपंच के कारगुजारियों के चलते भरे बरसात में नाली की खुदाई पंचायत के द्वारा कराई गई. जिसके चलते सड़कों पर कीचड़ के कारण आये दिन दुर्घटना हो रही है. वहीं सीमेंट से भरे ट्रक नाली में फंसने के कारण पिछले 24 घंटे रास्ता जाम था. दामापुर से फास्टरपुर जाने वाले मुख्य मार्ग बंद था. ऐसे में राहगीरों को 20 किलोमीटर घूमकर दामापुर तक पहुंच रहे थे.

कवर्धा जिला के अंतिम गांव सुकली गोविंद आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिये बाट जोह रहा है,ग्रामीणों की माने तो पिछले 70 साल से गांव का विकास नहीं हो पाया. कई सरपंच, जनपद सदस्य इस क्षेत्र से रहे है, लेकिन इस गांव का विकास नहीं हो सका. 2018 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने सुकली गोविंद के ममता चंद्राकर को अपना प्रत्याशी बनाया और जनता ने 36 हजार से अधिक मतों से विधायक बनाकर सदन में भेजा. ग्रामीणों में भारी उत्साह था चारो ओर खुशी की लहर थी. पहली बार सुकली गोविंद गांव से कोई विधायक बना और गांव में चारो ओर विकास होगा. लेकिन विधायक के घर से महज 200 मीटर में स्कूल और हॉस्पिटल है. जहां पर जाने के लिए रास्ते नहीं है. लोग कीचड़ औऱ 2 फीट पानी से गुजरकर स्कूल और हास्पिटल पहुंचते हैं. ग्राम पंचायत सुकली में लगभग 1600 जनसंख्या वाला अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्र है, लेकिन विकास कोसो दूर है.

कांग्रेस विधायक पंडरिया इलाके में विकास की गंगा बहा सकती थीं लेकिन असफल रहीं : भावना बोहरा

भाजपा नेत्री भावना बोहरा ने इस संवाददाता से बातचीत में कहा कि पंडरिया विधानसभा विधायक की निष्क्रियता का खामियाजा भुगत रहा है. अभी हाल ही में शिक्षा कर्मियों ने उनसे मिलकर अपनी समस्याएं हल करने की शिकायत दर्ज कराई है. जहां तक विकास की बात है तो खुद विधायक महोदया का गांव दुर्दशा के आंसू रो रहा है. जबकि वे कांग्रेस की सत्ता पक्ष से विधायक हैं चाहती तो इस इलाके में विकास की गंगा बहा देती लेकिन इच्छाशक्ति का अभाव और निष्क्रियता के कारण पंडरियावासियों ने अब नेतृत्व बदलने का मूड बनाया है और वे भाजपा में बेहतर​ विकल्प तलाश रहे हैं.

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