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एनकाउंटर पर नक्सली संगठन ने उठाए सवाल: कट्टा रामचंद्र और राजू दादा की मुठभेड़ को बताया फर्जी, आम सवाल : क्या नक्सली कानून और सरकार को मानते हैं

बिगुल
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी ने पुलिस द्वारा 22 सितम्बर को बताए गए मुठभेड़ को ‘फर्जी कहानी’बताया है। संगठन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दावा किया कि उनके केंद्रीय कमेटी सदस्य कामरेड कट्टा रामचंद्र रेड्डी उर्फ कडार सत्या नारायण रेड्डी और कामरेड राजू दादा की हत्या पुलिस हिरासत में की गई है। संगठन के मुताबिक पुलिस ने दोनों नेताओं को पहले गिरफ्तार किया और फिर योजनाबद्ध तरीके से हत्या कर दी। बाद में इसे मुठभेड़ का रूप देकर प्रचारित किया गया। माओवादी कमेटी ने इसे कानून के खिलाफ कार्रवाई बताते हुए कड़ी निंदा की है और न्यायिक जांच की मांग की है।

नक्सल संगठन ने बताया कि 20 सितम्बर को दोनों नेताओं को रायपुर व आसपास के इलाके से गुप्त रूप से गिरफ्तार किया गया। 22 सितम्बर को उनकी हत्या कर पुलिस ने मुठभेड़ की कहानी गढ़ दी। इस कथित मुठभेड़ को संगठन ने पूरी तरह मनगढ़ंत बताया। पुलिस द्वारा दी गई जानकारी में कई विरोधाभास हैं और यह सत्य को छिपाने की कोशिश है।

नक्सली संगठन का आरोप
माओवादी संगठन ने कहा कि गिरफ्तार किए गए नेताओं को अदालत में पेश करने की बजाय हत्या की गई। प्रेस विज्ञप्ति में इस कार्रवाई को लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ बताया गया है।

दूसरी ओर नक्सलियों के दावे से ना तो जनता उनके साथ है और ना ही सरकार. वह सवाल पूछ रही है कि जब नक्सली कानून व्यवस्था को नही मानते तो न्यायालय से न्याय मिलने की बात किस मुंह से कह रहे हैं।

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