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NIT रायपुर के रजिस्ट्रार विवाद में हाई कोर्ट का अवमानना नोटिस, पद कार्यग्रहण से रोकने पर दिखाई सख्ती

बिगुल
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) रायपुर के रजिस्ट्रार पद से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने संस्थान के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. हाई कोर्ट ने NIT रायपुर के डायरेक्टर डॉ. नारापराजू वेंकट रमन राव और तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. नरेंद्र दिगम्बर लोधे को अदालत के आदेश की अवहेलना करने के आरोप में अवमानना नोटिस जारी किया है.

बिना कारण निलंबन से शुरू हुआ विवाद
डॉ. आरिफ खान वर्ष 2021 में एनआईटी रायपुर में रजिस्ट्रार के पद पर नियुक्त हुए थे. नियमानुसार रजिस्ट्रार का कार्यकाल पांच वर्षों का होता है, जिसे हर वर्ष परफॉर्मेंस रिव्यू के आधार पर आगे बढ़ाया जाता है. डॉ. आरिफ खान के कार्यकाल के दौरान किसी प्रकार की प्रतिकूल टिप्पणी या शिकायत नहीं होने के बावजूद उन्हें बिना कोई कारण बताए निलंबित कर दिया गया. इसके खिलाफ डॉ. आरिफ खान ने अधिवक्ता हमीदा सिद्दीकी के माध्यम से वर्ष 2023 में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की.

हाई कोर्ट ने निलंबन को बताया अवैध
मामले की सुनवाई के बाद वर्ष 2025 में हाईकोर्ट ने डॉ. आरिफ खान का निलंबन अवैध घोषित कर दिया. न्यायालय ने उन्हें यह विकल्प दिया कि वे चाहें तो कश्मीर यूनिवर्सिटी में फाइनेंस ऑफिसर के पद पर बने रहें या फिर एनआईटी रायपुर में रजिस्ट्रार के पद पर पुनः कार्यभार ग्रहण करें. हाई कोर्ट से राहत मिलने के बाद डॉ. आरिफ खान ने यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर से इस्तीफा देकर एनआईटी रायपुर में कार्यग्रहण करने का निर्णय लिया.

एनआईटी प्रबंधन ने कार्यग्रहण से किया इनकार
जब डॉ. आरिफ खान एनआईटी रायपुर में कार्यभार ग्रहण करने पहुंचे, तब संस्थान के डायरेक्टर डॉ. नारापराजू वेंकट रमन राव और तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. नरेंद्र दिगम्बर लोधे ने उनका कार्यग्रहण स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इस कदम को हाईकोर्ट के आदेश की खुली अवहेलना बताते हुए डॉ. आरिफ खान ने पुनः अवमानना याचिका दायर की।

हाई कोर्ट की सख्ती, अधिकारियों को नोटिस
इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 13 जनवरी को प्रथम दृष्टया यह माना कि एनआईटी रायपुर के अधिकारियों का यह आचरण न्यायालय के आदेश का उल्लंघन है. इसके बाद कोर्ट ने डायरेक्टर और तत्कालीन रजिस्ट्रार को अवमानना नोटिस जारी करते हुए उनसे जवाब तलब किया है.

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