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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सख्ती, प्रदेश में फायर स्टेशनों की कमी पर जताई चिंता, सरकार से मांगा एक्शन प्लान

बिगुल
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में चल रही जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य में फायर एवं इमरजेंसी सेवाओं की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है. कोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि जिन स्थानों पर अब तक फायर स्टेशन नहीं हैं, वहां जल्द से जल्द व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत हलफनामे के अनुसार, वर्तमान में 9 जिलों में पूर्ण रूप से फायर स्टेशन संचालित हैं. दुर्ग, नवा रायपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर, जांजगीर-चांपा, कोरबा, रायगढ़, राजनांदगांव, कबीरधाम, बिलासपुर और उरला-सिलतरा में निर्माण जारी है.

सात जिलों में टेंडर प्रक्रिया चल रही
वहीं 7 जिलों में टेंडर प्रक्रिया चल रही है. जिसमें जशपुर, महासमुंद, कोरिया, दंतेवाड़ा, कांकेर, बलौदाबाजार, धमतरी शामिल है. कई जिलों में अभी भी फायर स्टेशन स्थापित ही नहीं हुए हैं, जहां फिलहाल होमगार्ड परिसर से अस्थायी संचालन हो रहा है.

संसाधनों की क्या स्थिति है?
राज्य में कुल 147 फायर फाइटिंग वाहन उपलब्ध हैं. वर्ष 2024-25 में 20 नए वाहन खरीदे गए. वर्ष 2025-26 में 7 और वाहन जोड़े गए. इसके बावजूद कई क्षेत्रों में संसाधनों की कमी बनी हुई है, खासकर बड़े भौगोलिक क्षेत्रों जैसे बस्तर संभाग में.

जमीन की कमी बनी बड़ी बाधा
सरकार ने कोर्ट को बताया कि फायर स्टेशन बनाने के लिए उपयुक्त जमीन नहीं मिल रही. कई जगह जो जमीन मिल रही है, वह शहर से बहुत दूर है, जिससे आपात स्थिति में रिस्पॉन्स टाइम बढ़ जाता है. सभी कलेक्टरों को निर्देश दिया गया है कि कम से कम 2 एकड़ जमीन उपयुक्त स्थान पर उपलब्ध कराएं.

बिलासपुर नगर निगम का पक्ष
नगर निगम बिलासपुर ने अपने हलफनामे में बताया कि फायर से जुड़ी सभी जिम्मेदारियां अब राज्य के फायर एंड इमरजेंसी सर्विस विभाग को सौंप दी गई हैं. यह बदलाव छत्तीसगढ़ फायर एंड इमरजेंसी सर्विस एक्ट, 2018 लागू होने के बाद हुआ. नगर निगम अब केवल समन्वय, जमीन उपलब्ध कराने और बुनियादी सुविधाएं देने में सहयोग कर रहा है.

एमिकस क्यूरी की गंभीर आपत्तियां
कोर्ट द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी ने अपनी रिपोर्ट में कई अहम खामियां बताईं. राज्य में फायर सेवाएं एकीकृत कमांड के बजाय अलग-अलग विभागों में बंटी हुई हैं. जैसे नगर निकाय, जिला प्रशासन, केंद्र सरकार की संस्थाएं (रेलवे, एनटीपीसी, एसईसीएल), निजी औद्योगिक इकाइयां. इससे समन्वय में कमी और आपात स्थिति में देरी हो रही है. साथ ही कानून में प्रावधान होने के बावजूद यूनिफाइड कमांड सिस्टम लागू नहीं हुआ, कई जगह फायर टेंडर और स्टाफ की भारी कमी है.

कोर्ट की अहम टिप्पणी
हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य के कई स्थानों पर अभी भी फायर स्टेशन नहीं हैं. उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी जल्द प्रभावी कदम उठाएंगे, ताकि आपात स्थिति में समय पर राहत मिल सके. अगली सुनवाई 4 मई को होगी. कोर्ट ने निर्देश दिया है कि फायर विभाग के डायरेक्टर नया हलफनामा पेश करें. उसमें अब तक की प्रगति और भविष्य की टाइमलाइन स्पष्ट हो.

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