भूखे-प्यासे बच्चों का रेस्क्यू, 16 में से 7 नाबालिग, काम दिलाने के नाम पर ले गए रायपुर, फिर भेजा दुर्ग

बिगुल
दुर्ग बस स्टैंड पर पुलिस, चाइल्ड हेल्पलाइन और विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 16 बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया. शुरुआती जांच में इनमें से 7 बच्चे नाबालिग पाए गए हैं. बताया जा रहा है कि सभी बच्चे सुबह से भूखे-प्यासे थे.
काम दिलाने के नाम पर बच्चों को ले गए रायपुर
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बच्चों को कवर्धा से रायपुर में काम दिलाने और बाद में उत्तर प्रदेश ले जाकर 15 हजार रुपये प्रतिमाह मजदूरी दिलाने का झांसा देकर लाया गया था. मामले की सूचना मिलते ही संयुक्त टीम ने तत्काल बस स्टैंड पहुंचकर कार्रवाई की और सभी बच्चों को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया.
16 में से 7 बच्चे नाबालिग
शुरुआती जांच में 7 बच्चे नाबालिग और 9 बालिग पाए गए, जो कि सुबह से भूखे-प्यासे थे और कवर्धा से आए थे. बच्चों को काम के लिए ले जाने की बात सामने आई है. वहीं बस स्टैंड पर उन्हें लेने पहुंचे एक व्यक्ति को पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है.
चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के जिला परियोजना समन्वयक चंद्रप्रकाश पटेल ने बताया कि बुधवार शाम सूचना मिली थी कि रायपुर से आ रही एक बस में 10 से अधिक बच्चों को काम के लिए ले जाया जा रहा है. सूचना मिलते ही पद्मनाभपुर थाना पुलिस को जानकारी दी गई और संयुक्त टीम दुर्ग बस स्टैंड पहुंचकर बस का इंतजार करने लगी.
बस स्टैंड पहुंचते ही टीम ने की जांच
रात करीब साढ़े 8 बजे बस दुर्ग बस स्टैंड पहुंची। टीम ने बस की जांच की तो उसमें 16 बच्चे मिले। सभी को सुरक्षित बस से उतारकर चाइल्ड हेल्पलाइन कार्यालय लाया गया, जहां उनकी गिनती, दस्तावेजों की जांच और पूछताछ की गई. पूछताछ में सामने आया कि बच्चों से पहले रायपुर में काम दिलाने की बात कही गई थी, जिसके बाद उन्हें दुर्ग भेजा गया। कई बच्चों ने बताया कि उन्हें यह तक नहीं पता था कि दुर्ग में कहां जाना है.
कुछ बच्चों ने यह भी बताया कि उन्हें उत्तर प्रदेश ले जाकर 15 हजार रुपए मासिक वेतन पर काम दिलाने का झांसा दिया गया था. फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है.
सुबह से भूखे-प्यासे थे बच्चे
रेस्क्यू किए गए सभी बच्चे सुबह से भूखे-प्यासे थे. उन्हें सुरक्षित निकालने के बाद सबसे पहले भोजन कराया गया. इसके बाद नाबालिग बच्चों को सुरक्षित आश्रय गृह में रखा गया. अधिकारियों ने बताया कि हर बच्चे की अलग-अलग काउंसलिंग और पूछताछ की जाएगी, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके.



