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ब्रेकिंग : शराब के धंधे में कूदा पिकाडिली एग्रो, मिला लाइसेंस, राज्य में बढ़ेगी देशी शराब उत्पादन और आपूर्ति

बिगुल
छत्तीसगढ़ के शराब उद्योग में एक नया अध्याय जुड़ गया है। राज्य में अब तक कुछ चुनिंदा कंपनियां ही देशी शराब के उत्पादन और आपूर्ति में सक्रिय थीं, लेकिन अब पिकाडिली एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रवेश से उद्योग में प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है। कंपनी ने महासमुंद जिले के बेल्टुकरी-भोरिंग क्षेत्र में अपनी नई डिस्टलरी का संचालन शुरू कर दिया है। राज्य सरकार द्वारा आवश्यक लाइसेंस जारी किए जाने के बाद कंपनी देशी शराब के उत्पादन और थोक आपूर्ति की प्रक्रिया में शामिल हो गई है। माना जा रहा है कि इससे प्रदेश में शराब की उपलब्धता बेहतर होगी और मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

शराब की उपलब्धता बढ़ाने में मिलेगी मदद
आबकारी विभाग से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि नई डिस्टलरी के संचालन से प्रदेश में देशी शराब की आपूर्ति मजबूत होगी। लंबे समय से कुछ क्षेत्रों में मांग और आपूर्ति के बीच असंतुलन की स्थिति देखी जा रही थी। नई उत्पादन इकाई शुरू होने के बाद इस समस्या में कमी आने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि उत्पादन क्षमता बढ़ने से अवैध बिक्री और कालाबाजारी जैसी गतिविधियों पर भी नियंत्रण लगाने में सहायता मिल सकती है।

सरकार ने तय की नई थोक दरें
राज्य के वाणिज्यिक कर विभाग ने पिकाडिली एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड के लिए वर्ष 2026-27 की शेष अवधि हेतु नई थोक प्रदाय दरें निर्धारित कर दी हैं। कंपनी द्वारा विभिन्न पैकिंग आकारों में देशी मदिरा की आपूर्ति की जाएगी।

निर्धारित थोक दरें
पैकिंग मसाला मदिरा (रु./पेटी), प्लेन मदिरा (रु./पेटी), 750 मि.ली., 973.08, 851.96, 375 मि.ली., 973.08, 851.96, 180 मि.ली., 972.95, 851.96, इन दरों के लागू होने से राज्य में थोक खरीद और वितरण व्यवस्था अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित होने की उम्मीद है।

प्लास्टिक बोतल में सप्लाई को लेकर मिला अतिरिक्त समय
राज्य सरकार ने वर्ष 2026 से देशी और विदेशी शराब की बिक्री फाइबर या प्लास्टिक बोतलों में करने की योजना लागू करने का निर्णय लिया था। हालांकि उत्पादन इकाइयों में तकनीकी चुनौतियों के कारण यह व्यवस्था अभी पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है। उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अधिकांश उत्पादन इकाइयों का बॉटलिंग सिस्टम कांच की बोतलों के अनुरूप विकसित किया गया है। प्लास्टिक बोतलों में भराई के दौरान उत्पादन की गति प्रभावित होने और क्षमता में कमी आने जैसी समस्याएं सामने आईं। इसी कारण सरकार ने कंपनियों को नई व्यवस्था लागू करने के लिए अतिरिक्त समय प्रदान किया है।

चावल आधारित शराब उत्पादन पर रहेगा फोकस
पिकाडिली एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड अनाज आधारित शराब उत्पादन के लिए जानी जाती है। जानकारी के अनुसार कंपनी अपनी नई इकाई में मुख्य रूप से चावल का उपयोग कर देशी शराब का उत्पादन करेगी। इससे प्रदेश के धान उत्पादक किसानों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर कृषि उत्पादों की मांग बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।

रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
नई डिस्टलरी के संचालन से महासमुंद और आसपास के क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा परिवहन, पैकेजिंग और सहायक उद्योगों को भी लाभ मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नए निवेश के साथ शराब उद्योग में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे उत्पादन गुणवत्ता और आपूर्ति तंत्र में सुधार देखने को मिल सकता है।

भविष्य की दिशा
पिकाडिली एग्रो के प्रवेश के साथ छत्तीसगढ़ का शराब उद्योग अधिक प्रतिस्पर्धी होने जा रहा है। उत्पादन क्षमता बढ़ने, आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होने और स्थानीय संसाधनों के उपयोग से राज्य सरकार को राजस्व वृद्धि की भी उम्मीद है। आने वाले महीनों में प्लास्टिक बोतल आधारित सप्लाई व्यवस्था पूरी तरह लागू होने पर वितरण प्रणाली और अधिक आधुनिक और प्रभावी बन सकती है।

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