पुश्तैनी जमीन के अधिकार को लेकर ग्रामीणों का प्रदर्शन, राजस्व रिकॉर्ड की जांच की मांग

बिगुल
सूरजपुर जिले के प्रेमनगर विकासखंड स्थित नवापाराकला गांव में लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवाद को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया है। अपनी पैतृक जमीनों पर अधिकार बहाल कराने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर राजस्व अभिलेखों में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच की मांग की।
जमीन के रिकॉर्ड में गड़बड़ी का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व रिकॉर्ड में वर्षों पहले हुई त्रुटियों के कारण कई परिवारों की जमीन विवादों में फंस गई है। कई मामलों में जमीन पर कब्जा एक व्यक्ति का है, जबकि सरकारी दस्तावेजों में मालिकाना हक किसी अन्य के नाम दर्ज है। इससे गांव में लगातार विवाद की स्थिति बनी हुई है और वास्तविक भू-स्वामियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सैकड़ों परिवारों की जमीन प्रभावित
ग्रामीणों ने दावा किया है कि गांव के 300 से अधिक लोगों की भूमि से संबंधित रिकॉर्ड में विसंगतियां हैं। उनका आरोप है कि इन खामियों का फायदा उठाकर कुछ लोग विवादित जमीनों की खरीद-फरोख्त कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते रिकॉर्ड का सत्यापन नहीं किया गया तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
स्कूल की जमीन पर भी उठे सवाल
ज्ञापन में ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि गांव में वर्ष 1973 में स्थापित शासकीय विद्यालय की भूमि को भी कथित रूप से बेच दिया गया है। उनका कहना है कि मामला केवल निजी जमीनों तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रशासन के सामने रखीं प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने प्रशासन से भूमि अभिलेखों की विशेष जांच कराने, रिकॉर्ड में दर्ज त्रुटियों को सुधारने, विवादित जमीनों की खरीद-बिक्री पर तत्काल रोक लगाने और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और वास्तविक भू-स्वामियों को उनका अधिकार दिलाने की मांग भी की गई है।
कलेक्टर ने दिया कार्रवाई का भरोसा
ग्रामीणों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर रेना जमील ने मामले की जांच कराने और तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। प्रशासन अब शिकायतों की पड़ताल कर आगे की प्रक्रिया तय करेगा।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। ऐसे में अब पूरे मामले पर प्रशासन की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर लोगों की नजर टिकी हुई है।



