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प्रभारी DEO मनीराम यादव पर करोड़ों के घोटाले का आरोप, अपर कलेक्टर को नहीं दिए दस्तावेज, कमिश्नर से कार्यवाही की मांग

बिगुल
बलरामपुर के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) मनीराम यादव के खिलाफ एक बार फिर भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और शासकीय राशि के गबन के गंभीर आरोप लगाते हुए सरगुजा संभाग के कमिश्नर को विस्तृत शिकायत सौंपकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है.

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मनीराम यादव का पूर्व का विवादित रिकॉर्ड होने के बावजूद उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं, जिससे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और शासन की छवि प्रभावित हो रही है. दूसरी तरफ मंगलवार को अपर कलेक्टर प्रमोद गुप्ता की जांच टीम जिला शिक्षा अधिकारी जांच करने के लिए पहुंची तब जांच टीम को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए. स्टोर का प्रभारी अचानक छुट्टी लेकर चला गया था और जिला शिक्षा अधिकारी ने भी अपर कलेक्टर को कोई भी दस्तावेज जांच के लिए नहीं दिए. इससे जिला शिक्षा अधिकारी पर और भी कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं. दूसरी तरफ अपर कलेक्टर ने इसे गंभीर मामला बताया है.

शिकायत कर्ता ने कमिश्नर से की जांच की मांग

शिकायतकर्ता विमलेश देवांगन ने कमिश्नर को दिए आवेदन में कई गंभीर बिंदुओं का उल्लेख करते हुए निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग की है. 2016 के मध्यान्ह भोजन घोटाले का भी जिक्र शिकायत में कहा गया है कि वर्ष 2016 में मनीराम यादव, लुण्ड्रा विकासखंड में प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) के पद पर पदस्थ थे. उस दौरान मध्यान्ह भोजन योजना के तहत लगभग 2 करोड़ 42 लाख 93 हजार 501 रुपये की वित्तीय अनियमितता, गबन और राशि को निजी खातों में स्थानांतरित करने के आरोप लगे थे. आवेदन के अनुसार, शिकायत की जांच के बाद तत्कालीन कलेक्टर सरगुजा के आदेश पर 22 अगस्त 2016 को मणिराम यादव को पद से हटाया गया था तथा विभागीय जांच भी प्रारंभ की गई थी.
विभागीय जांच दबाने का आरोप

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि विभागीय जांच को प्रभाव और आर्थिक लेन-देन के माध्यम से प्रभावित किया गया, जिसके कारण आज तक मामले में अंतिम कार्रवाई नहीं हो सकी. आवेदन में यह भी दावा किया गया है कि वर्तमान में भी उनके खिलाफ अवैध वसूली, अनुचित दबाव और शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने जैसी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं.
पांच प्रमुख मांगें

शिकायत में कमिश्नर से मांग की गई है कि—
वर्ष 2016 के मध्यान्ह भोजन योजना प्रकरण की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए.
वित्तीय अभिलेख, बैंक खाते और विभागीय रिकॉर्ड का दोबारा परीक्षण कराया जाए.
जांच अवधि के दौरान उन्हें वर्तमान पद से हटाया जाए ताकि निष्पक्ष जांच प्रभावित न हो.
आरोप सही पाए जाने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत कानूनी कार्रवाई की जाए.
बलरामपुर जिले की शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली की स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए.

पूर्व पदस्थापना को लेकर भी उठाए सवाल

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि विभागीय जांच लंबित रहने के बावजूद मणिराम यादव को बाद में जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड में भी प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी बनाया गया, जहां उनके खिलाफ अवैध धन की मांग और अन्य शिकायतें सामने आने का दावा किया गया है.

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