छत्तीसघाट
झीरम घाटी कांड : कांग्रेस ने न्यायिक फैसले की तारीफ की मगर सवाल भी उठाए, जानिए उन छह कारणों को जब कांग्रेस सरकार शहीदों को न्याय दिलाने से चूक गई !

बिगुल
झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में न्यायालय के फैसले के बाद विपक्षी दल कांग्रेस, भाजपा सरकार पर हमलावर है. कांग्रेस नेताओं ने न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हुए 10 आरोपियों को दोषी ठहराए जाने को न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। हालांकि पार्टी ने कहा कि झीरम घाटी की घटना से जुड़े कई अहम सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। कांग्रेस ने पूरे घटनाक्रम के प्रत्येक पहलू की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई प्रदेश की जनता के सामने लाने की मांग की।
दूसरी ओर हमने उन कारणों को तलाशा जिसमें कांग्रेस को मौका मिला मगर वह इस मामले को सुलझाने में विफल रही.
- कांग्रेस में 5 साल 2018-23 तक छत्तीसगढ़ में राज किया लेकिन झीरम घाटी कांड के पीड़ितों को कोई न्याय नहीं दिला सकी जबकि पीड़ित परिवार कांग्रेस पार्टी के और पुलिसकर्मियों के ही थे।
- झीरम घाटी हमले की घटना के समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी तबकी सरकार ने कुछ खास नहीं किया? एक आरोपी तक नही पकड़ा जा सका.
- कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार ने छत्तीसगढ़ में सीबीआई को ही बैन कर दिया था जबकि सीबीआई झीरम घाटी मामले की जांच कर रही थी लेकिन कांग्रेस ने उस जांच को मानने से इनकार कर दिया था, ऐसे में जांच कई साल तक रुकी रही?
- झीरम घाटी हमला के बाद जब कांग्रेस नेता अस्पताल पहुंचे तो अपने ही एक वरिष्ठ नेता पर दूसरे नेता ने कटाक्ष किया था कि सबको तू ही ले गया था वहाँ, इसका वीडियो भी वायरल हुआ था
- कांग्रेस नेता भूपेश बघेल दावा करते रहे कि झीरम हमले के सबूत उनकी जेब में हैं, वे 5 साल सीएम रहे, मगर सबूत नहीं दे सके और न ही उसके आधार पर किसी दोषी को पकड़ सके।
- बघेल सरकार के दौरान झीरम हमले के पीड़ित परिवारों ने कई बार सरकार से मांग की मगर उनकी बात को भी नहीं सुना गया। उन्हें 5 साल में न्याय नहीं मिला।
भाजपा नेता झीरम घाटी काण्ड के न्यायपरक फैसले में अपनी सरकार द्वारा किए गए प्रयासों को गिना रहे हैं :
- घटना के तुरंत बाद भाजपा की तत्कालीन रमन सरकार ने मामला एनआईए को सौंप दिया था, जिसने अपनी चार्जशीट दाखिल कर लंबी जांच की।
- रमन सरकार ने मार्च 2016 में बहुचर्चित झीरम घाटी कांड की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो(सीबीआई) से करवाने का ऐलान किया मगर नतीजा सिफर रहा।
- कांग्रेस पार्टी और नेताओं ने कई बार इसे एक बड़ी राजनीतिक साजिश बताते हुए इसकी सीबीआई या उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी, क्योंकि उनका मानना था कि इस हमले के पीछे बड़े षड्यंत्रकारी भी शामिल थे. तत्कालीन कांग्रेस विधायक लखेश्वर बघेल ने मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग उठाई. इसके लिए उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पीसीसी चीफ मोहम मरकाम को भी पत्र लिखने की बात कही है.
- लेकिन 2018 में जब कांग्रेस सरकार बनी तो तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सीबीआई को ही बैन कर दिया था।
- विष्णु देव सरकार ने जब बस्तर से नक्सलियों का सफाया अभियान चलाया तो कई नक्सली कमांडरों को गिरफ्तार किया तथा उन्हें मार गिराया जो झीरम घाटी हमले के दोषी थे। इसकी तारीफ पीड़ित कांग्रेस सरकार के परिजनों ने भी की थी।
- राज्य सरकार ने बस्तर से नक्सलियों का सफाया कर दिया तथा कई नक्सली को गिरफ्तार किया जो नक्सली हमले में शामिल थे। दूसरी ओर कांग्रेस विधायक आज भी नक्सलियों के साथ सहानुभूति रखने वाले बयान दे रहे हैं। ऐसा करके वे शहीद परिजनों के जख्मों पर मलहम लगा रहे हैं।



