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छत्तीसगढ़ी बोली में रामलीला का अनूठा मंचन, गड़बेड़ा की परंपरा पहुंची राष्ट्रीय स्तर पर

बिगुल
छत्तीसगढ़ की लोकभाषा और पारंपरिक रंगमंच को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। महासमुंद जिले के पिथौरा विकासखंड के ग्राम गड़बेड़ा में वर्षों से मंचित की जा रही ठेठ छत्तीसगढ़ी रामलीला का उल्लेख ‘ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया ऑफ द रामायण’ में किया गया है। इस उपलब्धि से स्थानीय कलाकारों, ग्रामीणों और रामलीला समिति में खासा उत्साह है।

ठेठ छत्तीसगढ़ी अंदाज में होती है रामलीला
गड़बेड़ा की रामलीला की सबसे बड़ी विशेषता इसकी स्थानीय प्रस्तुति शैली है। यहां रामायण के प्रसंगों को पारंपरिक मंचन के साथ ठेठ छत्तीसगढ़ी बोली, स्थानीय संवाद और आंचलिक अंदाज में प्रस्तुत किया जाता है। रामलीला के संवाद और निर्देशन की जिम्मेदारी वरिष्ठ रंगकर्मी प्रीतराम सूर्ये संभालते हैं। प्रस्तुति में पारंपरिक दोहा-चौपाइयों के साथ शेरो-शायरी का प्रयोग भी देखने को मिलता है। छत्तीसगढ़ी भाषा और स्थानीय संवाद शैली के इस अनूठे मेल ने रामलीला को अलग पहचान दिलाई है।

‘ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया ऑफ द रामायण’ में मिला स्थान
गड़बेड़ा की इस अनूठी रामलीला का उल्लेख ‘ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया ऑफ द रामायण’ में किया गया है। यह पुस्तक उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग के अंतर्गत संचालित अयोध्या शोध संस्थान द्वारा प्रकाशित की गई है। राष्ट्रीय स्तर की पुस्तक में गड़बेड़ा की रामलीला समिति और उसकी विशिष्ट प्रस्तुति को जगह मिलना स्थानीय सांस्कृतिक परंपरा के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

कलाकारों और ग्रामीणों में उत्साह
पुस्तक में रामलीला का उल्लेख होने के बाद गड़बेड़ा के कलाकारों और ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सम्मान केवल रामलीला समिति तक सीमित नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ी भाषा, लोककला और ग्रामीण सांस्कृतिक परंपरा की पहचान को भी मजबूत करता है। हर वर्ष की परंपरा के अनुसार इस बार भी शारदीय नवरात्रि और विजयादशमी के अवसर पर रामलीला का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए शीतला मंदिर परिसर स्थित सामुदायिक भवन में स्थानीय युवा कलाकार लगातार अभ्यास कर रहे हैं।

राम-सीता से लेकर हनुमान तक, छत्तीसगढ़ी संवाद में दिखेंगे पात्र
रामलीला में भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और पवनपुत्र हनुमान समेत विभिन्न पात्रों को स्थानीय कलाकार मंच पर जीवंत करेंगे। वरिष्ठ रंगकर्मी प्रीतराम सूर्ये के मार्गदर्शन में कलाकार संवाद और अभिनय की तैयारी में जुटे हैं। स्थानीय बोली में रामायण के प्रसंगों की प्रस्तुति दर्शकों को धार्मिक कथा के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की लोकभाषा और संस्कृति से भी जोड़ती है।

विजयादशमी पर होगा 30 फीट ऊंचे रावण का दहन
विजयादशमी के दिन शाम को मुख्य रामलीला मंचन के बाद आतिशबाजी के बीच 30 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। इसके बाद रात में रायपुर के प्रसिद्ध लोक कला मंच ‘नवा अंजोर’ की ओर से छत्तीसगढ़ी संस्कृति, गीत और नृत्य पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा। रामलीला आयोजन को लेकर ग्राम पंचायत, सरपंच बूंदाबाई नायक, रामलीला समिति और ग्राम विकास समिति के सदस्य तैयारियों में जुटे हैं। गड़बेड़ा की ठेठ छत्तीसगढ़ी रामलीला को मिली राष्ट्रीय स्तर की पहचान इस बात को रेखांकित करती है कि स्थानीय भाषा और लोक परंपराएं भी व्यापक सांस्कृतिक मंच पर अपनी अलग जगह बना सकती हैं।

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