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ब्रेकिंग : पीएससी सदस्य प्रवीण वर्मा, संत कुमार पासवान, सरिता उइके की राज्यपाल से शिकायत, भ्रष्टाचार का आरोप, बॉयलर निरीक्षक भर्ती में हुई गड़बड़ी, अदालती आदेश से पुष्टि, भाजपा नेता गौरी शंकर श्रीवास ने उठाया मामला

रायपुर. छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के तीन सदस्यों के तथाकथित भ्रष्टाचार के खिलाफ राजभवन में लिखित शिकायत की गई है। भाजपा प्रवक्ता गौरी शंकर श्रीवास ने आज राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपा तथा पीएससी के तीन सदस्य प्रवीण वर्मा, संत कुमार पासवान, सरिता उइके को उनके पद से हटाने की मांग की है।

भाजपा प्रवक्ता गौरी शंकर श्रीवास ने जो ज्ञापन सौंपा है, उसके मुताबिक उद्योग विभाग द्वारा विगत 23 अक्टूबर 2024 को बॉयलर निरीक्षक भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था जिसमें हजारों युवाओं ने आवेदन किया था लेकिन सारे नियमों को दरकिनार करते हुए एक अभ्यर्थी कानन वर्मा जो कि भर्ती द्वारा तय विज्ञापन की उम्र की सीमा की अर्हताओं की श्रेणी में नहीं आते, उन्हें नियुक्ति दी गई जो कि पूरी तरह से छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की पारदर्शिता तथा विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है।

श्रीवास ने आगे बताया कि उक्त भर्ती के खिलाफ एक अन्य अभ्यर्थी द्वारा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई जिस पर माननीय छ.ग. उच्च न्यायालय बिलासपुर का आदेश कमांक WPS No. 6748 of 7025 दिनांक 17.02.2026 स्पष्ट रूप से रेखाकिंत करता है कि कानन वर्मा कि नियुक्ति पूरी तरह से अनुचित है तथा गलत तरीके से उन्हें लाभ पहुँचाने की चेष्ठा की गई है। ओवरएज होने के बाद भी उन्हें नियुक्ति दी गई। इस विषय में दूसरे अभ्यर्थी साकेत अग्रवाल ने हाईकोर्ट में पीटीशन दाखिल की जिस पर हाई कोर्ट ने फैसला देते हुए साकेत अग्रवाल को नियुक्ति देने का आदेश जारी किया है जिसके बाद विभाग ने चुप्पी साध रखी है!

इधर अब मामला गरमाने के बाद भाजपा नेता गौरी शंकर श्रीवास ने लोक सेवा आयोग में शिकायत दर्ज करते हुए भूपेश सरकार के समय नियुक्त हुए तीनों सदस्यों प्रवीण वर्मा, संत कुमार पासवान, सरिता उइके को हटाने की मांग कर दी है! उन्होंने कहा कि पूर्व की कांग्रेस पार्टी की सरकार में नियुक्त तीनों सदस्य प्रवीण वर्मा, संत कुमार पासवान, सरिता उइके की गतिविधियां काफी संदिग्ध है। पूर्व के पीएसएसी घोटाले में भी ये तीनों सदस्य दागदार रहे हैं तथा इनके सामने सारे घोटाले को अजांम दिया गया है अतः मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए कड़ी कार्यवाही की जाए। तीनों सदस्यों को उनके पद से तत्काल हटाया जाए साथ ही बॉयलर निरीक्षक भर्ती घोटाले की नए सिरे से जांच हो।

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