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मौत की छत’ के नीचे पढ़ाई! जर्जर हुई कॉलेज की बिल्डिंग, PWD ने दिया तोड़ने का आदेश, खतरे में 5 हजार छात्रों की जान

बिगुल
सरगुजा संभाग के सबसे बड़े शासकीय राजीव गांधी पीजी कॉलेज में हजारों छात्र हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं. कॉलेज की करीब 55 साल पुरानी जर्जर इमारत को लेकर लोक निर्माण विभाग (PWD) ने एक साल पहले ही भवन के एक हिस्से को तोड़ने का आदेश जारी कर दिया था, लेकिन आज तक न तो भवन को तोड़ा गया और न ही नया निर्माण शुरू हो सका. नतीजा यह है कि करीब 5 हजार छात्रों की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी गई है.

PWD ने बताया खतरनाक, फिर भी पढ़ाई जारी

PWD के इंजीनियरों ने भवन को असुरक्षित मानते हुए कॉलेज प्रबंधन को पत्र भेजकर जर्जर हिस्से को ध्वस्त करने के निर्देश दिए थे. इसके बावजूद उच्च शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया. जिस भवन को विभाग खुद खतरनाक मान चुका है, उसी भवन में आज भी नियमित कक्षाएं लग रही हैं.
लॉ विभाग की हालत सबसे खराब

कॉलेज के विधि (एलएलबी) विभाग की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है. यहां करीब 240 छात्र पढ़ाई करते हैं. बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है, जबकि जगह-जगह से प्लास्टर टूटकर गिर रहा है. इसके बावजूद छात्रों को उसी कक्षा में बैठने के लिए मजबूर किया जा रहा है. सवाल यह है कि अगर कोई बड़ा हादसा हो गया तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
क्या किसी हादसे के बाद जागेगा प्रशासन?

छात्रों और पूर्व छात्र नेताओं का कहना है कि वे वर्षों से जर्जर भवन की मरम्मत और नए भवन की मांग कर रहे हैं. कई जनप्रतिनिधि और बड़े अधिकारी कॉलेज का दौरा कर चुके हैं, लेकिन किसी ने भी इस गंभीर समस्या के समाधान की दिशा में पहल नहीं की. छात्रों का कहना है कि प्रशासन शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है.
45 की जगह 22 कमरों में चल रहा कॉलेज

कॉलेज के प्राचार्य अनिल कुमार सिन्हा ने स्वीकार किया कि कॉलेज के सुचारु संचालन के लिए 45 कमरों की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में केवल 22 कमरे उपलब्ध हैं. कमरों की कमी के कारण कई कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं और छात्रों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं.

लापरवाही की कीमत चुका रहे छात्र

कॉलेज की बदहाल व्यवस्था का असर अब शिक्षा की गुणवत्ता पर भी पड़ने लगा है. प्रोफेसरों की कमी और आधारभूत सुविधाओं के अभाव को देखते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने कॉलेज की एलएलबी की 240 सीटों को घटाकर 120 कर दिया. जबकि हर साल एक हजार से अधिक छात्र प्रवेश के लिए आवेदन करते हैं. यानी सरकारी लापरवाही के कारण छात्रों के भविष्य पर भी सीधा असर पड़ रहा है.

जिस भवन को PWD एक साल पहले ही खतरनाक घोषित कर चुका है, उसमें आज भी हजारों छात्र पढ़ाई कर रहे हैं. आखिर उच्च शिक्षा विभाग और प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों कर रहे हैं? यदि समय रहते इस जर्जर भवन को हटाकर नई इमारत का निर्माण नहीं कराया गया, तो किसी भी अप्रिय घटना की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और अधिकारियों पर होगी.

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