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सड़कों की हालत पर हाईकोर्ट सख्त, कहा 2200 करोड़ दिए, फिर भी नही बनी सड़क, जनहित कार्यों में आचार संहिता नहीं

बिगुल
बिलासपुर. हाईकोर्ट में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए, चीफ जस्टिस ने नाराजगी जाहिर की है, चीफ जस्टिस ने महाधिवक्ता से कहा कि जब तक ये रोड ठीक नहीं होगी, आप ऐसे ही आएंगे और जाएंगे

खराब सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट में शासन की ओर से कहा गया कि विधानसभा की जर्जर सड़क को बनाने के लिए 22.5 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए थे, लेकिन आचार संहिता के चलते टेंडर जारी नहीं किया गया है।

न्याय मित्रों ने डिवीजन बेंच को बताया कि जनहित के कामों में आचार संहिता लागू नहीं होती। इसके बाद चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस रवींद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने टेंडर जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही एडवोकेट जनरल को पूरी प्रक्रिया पर निगरानी रखने के लिए कहा है।

प्रदेश भर की जर्जर सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान न्याय मित्रों ने रेफरेंस रोड को लेकर अपनी रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट में बताया गया कि रायपुर एयरपोर्ट तक जाने वाली सड़क पर धनेली के पास और विधानसभा मार्ग की हालत खस्ता है। सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे हैं। स्ट्रीट लाइट भी नहीं जल रही है। रात में हादसे की आशंका रहती है।

कोर्ट ने इस पर नाराजगी जाहिर की और स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए. उप महाधिवक्ता यशवंत सिंह ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि सड़क निर्माण और सौंदर्यीकरण के लिए राज्य शासन ने करीब 22.5 करोड़ रुपए की स्वीकृति दे दी हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव की आचार संहिता प्रभावी होने के कारण काम शुरू नहीं हो सका है और टेंडर जारी नहीं हो पा रहा है।

सड़कों की स्थिति और स्ट्रीट लाइट्स को लेकर अफसरों के जवाब पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि पिछली सुनवाई के दौरान ‘अधिकारियों ने गलत शपथ पत्र दिया, जबकि लाइटें नहीं जल रही हैं, मैं दो दिन पहले ही आया हूं। महाधिवक्ता से सीजे ने कहा कि व्यवस्था को देखिए।’

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