मध्यप्रदेश

सरकारी नौकरी छोड़ी, कमरे से शुरू की मशरूम खेती; ₹21 लाख से खड़ा किया ₹55 लाख का कारोबार, किसान कार्तिकेय की कहानी

बिगुल
मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के युवा किसान कार्तिकेय मंडलोई ने पारंपरिक खेती से अलग हटकर कृषि को कारोबार का रूप देकर नई मिसाल पेश की है। सरकारी नौकरी छोड़कर खेती और कृषि व्यवसाय में उतरे कार्तिकेय ने एक छोटे से कमरे से मशरूम फार्मिंग की शुरुआत की। करीब 21 लाख रुपये के शुरुआती निवेश से शुरू हुआ उनका यह सफर आगे बढ़कर 55 लाख रुपये की कमाई तक पहुंच गया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ आयोजित कृषि नवाचार संवाद कार्यक्रम में कार्तिकेय ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि किस तरह सीमित संसाधनों के बावजूद आधुनिक तकनीक अपनाकर खेती को लाभदायक व्यवसाय बनाया जा सकता है।
छोटे कमरे से शुरू किया मशरूम का कारोबार

कार्तिकेय ने कम जगह में मशरूम उत्पादन शुरू करने का फैसला किया। उनका फोकस ऐसी कृषि तकनीकों पर था, जिनमें बड़े खेत की आवश्यकता न हो और सीमित स्थान का अधिकतम उपयोग किया जा सके।

शुरुआत में उन्होंने करीब 21 लाख रुपये का निवेश किया। समय के साथ उत्पादन और बाजार की समझ बढ़ी तो उनका कृषि व्यवसाय भी विस्तार करता गया। इसी का नतीजा रहा कि उनका कारोबार 55 लाख रुपये की कमाई तक पहुंच गया। कार्तिकेय की सफलता यह दिखाती है कि कृषि व्यवसाय शुरू करने के लिए हमेशा बड़ी जमीन की जरूरत नहीं होती। तकनीक, प्रशिक्षण, सही योजना और बाजार की मांग को समझकर छोटे स्तर से भी बेहतर आय का मॉडल तैयार किया जा सकता है।
अब किसानों को दे रहे कृषि व्यवसाय की ट्रेनिंग

मशरूम उत्पादन में सफलता हासिल करने के बाद कार्तिकेय ने अपने अनुभव को दूसरे किसानों के साथ साझा करना शुरू किया। वे अब इंदौर में किसानों को विभिन्न आधुनिक कृषि गतिविधियों से जुड़ी ट्रेनिंग दे रहे हैं। उनके प्रशिक्षण कार्यक्रमों में मशरूम फार्मिंग, मेडिकल मशरूम, मोती की खेती, मधुमक्खी पालन और माइक्रोग्रीन्स जैसी गतिविधियां शामिल हैं। अब तक 50 से अधिक किसानों को मशरूम फार्मिंग और करीब 80 किसानों को पर्ल फार्मिंग की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। इसके जरिए किसानों को खेती के साथ अतिरिक्त आय के नए विकल्पों की जानकारी मिल रही है।
मोती की खेती भी बन रही अतिरिक्त कमाई का जरिया

कार्तिकेय किसानों को पर्ल फार्मिंग यानी मोती की खेती के बारे में भी प्रशिक्षित कर रहे हैं। सामान्य तौर पर मोती की खेती में करीब 8 से 9 महीने का समय लग सकता है। इसे किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का एक विकल्प माना जा रहा है।

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