ब्रेकिंग : सांसद और उद्योगपति नवीन जिंदल ने वेतन, सभी सरकारी भत्ते और सुविधाएं ठुकराईं, उड़ीसा में कंपनी को मिला आयरन ओर ब्लॉक, आस्ट्रेलिया के साथ मिलकर अब धान के भूसे से स्टील बनाएगा जेएसपीएल

बिगुल
कुरुक्षेत्र हरियाणा से भाजपा सांसद और जिंदल स्टील एण्ड पावर लिमिटेड के मालिक नवीन जिंदल ने बतौर सांसद वेतन, सभी सरकारी भत्ते और सुविधाएं ठुकरा दी हैं। यानि उन्होंने इसे लेने से इंकार कर दिया है। लोकसभा सचिवालय में लगी एक आरटीआई के जवाब में यह बात निकलकर सामने आई है।
लोकसभा सचिवालय के अनुसार, जिंदल स्टील एण्ड पावर लिमिटेड के मालिक तथा सांसद नवीन जिंदल ने देशहित में यह सुविधाएं लेने से इंकार कर दिया है। इसी तरह सांसद डॉ. बिमोल अकोइजाम (कांग्रेस, इनर मणिपुर) ने भी सिर्फ वेतन नहीं लिया है।
श्री जिंदल की यह पहल देशहित में देखी जा रही है। यह अन्य सांसदों के लिए भी अनुकरणीय है जो अर्थ संपन्न होने के बावजूद सरकारी तनख्वाह और सुविधाएं उठा रहे हैं। जानते चलें कि नवीन जिंदल जेएसपीएल के चेयरमैन हैं तथा उनकी घोषित संपत्ति 1,241 करोड़ रुपये है। गुजरे 9 मार्च को देशभर में उनका जन्मदिन मनाया गया था।
उड़ीसा में कंपनी को मिला आयरन ओर ब्लॉक
जिंदल स्टील ने ओडिशा में बड़ी जीत हासिल की! देश में स्टील की बड़ी कंपनी ने ठकुरानी-A1 आयरन ओर ब्लॉक 101% प्रीमियम पर हासिल किया, जिससे उसके प्रोडक्शन और ग्रोथ प्लान को मजबूत करने के लिए 50 मिलियन टन स्ट्रेटेजिक रिसोर्स जुड़ गए। इसके बाद कंपनी राज्य को 101.20% प्रीमियम की पेशकश कर रहा है, जिससे उसके इस्पात परिचालन के लिए महत्वपूर्ण कच्चे माल तक पहुंच सुरक्षित हो गई है।
जिंदल स्टील ने ओडिशा में 50 MT आयरन ओर ब्लॉक जीता है। इससे राज्य सरकार को 101.2% प्रीमियम मिलेगा।
एक अन्य सकारात्मक खबर के मुताबिक ओडिशा के क्योंझर ज़िले में मिनरल से भरपूर ठकुरानी-A1 आयरन ओर ब्लॉक के लिए जिंदल स्टील को पसंदीदा बिडर घोषित किया गया है। 202 हेक्टेयर के इस ब्लॉक में लगभग 50 मिलियन टन आयरन ओर रिसोर्स हैं और इसे 101.20% प्रीमियम की विनिंग बिड के साथ हासिल किया गया, जिससे कंपनी का लॉन्ग-टर्म रॉ मटेरियल बेस मज़बूत हुआ।

अब धान के भूसे से स्टील बनेगा
भारत और ऑस्ट्रेलिया ने मिलकर स्टील बनाने की नई तकनीक विकसित की है। अब धान के भूसे से स्टील बनेगा। ओडिशा के जिंदल स्टील में ट्रायल सफल रहा। योजना के अनुसार 10% भूसा मिलाकर कोयले की जगह इस्तेमाल किया गया। इससे प्रदूषण 50% तक घटेगा। किसानों की पराली अब काम आएगी और स्टील कंपनियों को भी फायदा होगा।



