दर्दनाक : क्रेशर माफिया का आतंक, आदिवासी मजदूर पर गिरा डेढ़ क्विंटल लोहे का पार्ट्स, चली गई जान, परिजनों में गुस्सा

बिगुल
बलरामपुर जिले में क्रेशर माफिया का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा है. यहां मजदूरों से भी क्रशर संचालक मजदूरी का काम कर रहे हैं और उनकी जिंदगी खतरे में है.
रविवार को कल राजपुर क्षेत्र के भिलाई स्थित सिंघल गिट्टी क्रेशर में काम के दौरान एक 20 वर्षीय अलमोन उरांव नामक बरगीडीह निवासी मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई. उरांव जनजाति से आने वाला बरगीडीह निवासी मजदूर क्रेशर में काम कर रहा था. क्रेशर के झरना पर लगा डेढ़ क्विंटल वजनी लोहे का कीप उसके ऊपर गिर गया और मौके पर ही वह गंभीर रूप से घायल होकर बेहोश हो गया. मजदूर झरना में घुसने के बाद वहां सफाई का काम कर रहा था. इस दौरान यह हादसा हुआ और मजदूर को सुरक्षा के लिए कोई भी सेफ्टी उपलब्ध नहीं कराया गया था.
लोहे का पार्ट्स गिरने से आदिवासी मजदूर की मौत
हैरानी की बात तो यह है कि इस घटना के बाद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है जानकारी के अनुसार घायल होने के बाद मजदूर को अंबिकापुर के अस्पताल में ले जाया गया और जहां डॉक्टरों ने उसे कुछ देर बाद मृत घोषित कर दिया और आज अंबिकापुर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पोस्टमार्टम कक्ष में उसका पोस्टमार्टम किया जाएगा.
बलरामपुर में क्रेशर माफियाओं का आतंक
चर्चा है कि क्रेशर मालिक विजय सिंघल ने इस क्रेशर को कुछ महीना पहले दूसरे क्रशर संचालकों को बेच दिया था, इसके बाद इसका संचालन बलरामपुर जिला के क्रेशर संघ के जिला अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल सहित अन्य लोगों के द्वारा किए जाने की बात सामने आ रही है. हालांकि इसकी सच्चाई की जांच पुलिस के द्वारा की जा रही है. राजपुर क्षेत्र के बरियों, बघिमा, भिलाई इलाके में अवैध तरीके से कई क्रेशर और गिट्टी खदान संचालित किया जा रहे हैं. लेकिन इसके बावजूद इन क्रशर संचालकों के खिलाफ जिला प्रशासन के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है वहीं दूसरी तरफ क्रेशर संचालक सीधे तौर पर मजदूरों की जिंदगी के साथ शुरुआत कर रहे हैं बताया तो यहां तक जाता है कि क्रेशर संचालको के खिलाफ कार्रवाई इसलिए नहीं हो पाती है क्योंकि इनकी पहुंच राजनीतिक स्तर पर काफी तगड़ी है. वहीं खनिज और जिला प्रशासन के अफसरों से अवैध लेनदेन की चर्चा आम रही है.
क्रेशर मालिकों पर कार्रवाई की हो रही मांग
दूसरी तरफ अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने इस पूरे मामले में प्रशासन से क्रशर मालिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है और कहा है कि आदिवासी मजदूर का क्रशरों में सिर्फ शोषण किया जा रहा है उनकी जान के साथ खिलवाड़ की जा रही है. जिला प्रशासन बिल्कुल खामोश है इतना ही नहीं उन्होंने आरोप लगाया है कि अवैध तरीके से कई गिट्टी खदान संचालित है और स्थानीय लोग कई बार शिकायत करते रहे हैं लेकिन जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती रही है.
क्रेशर मालिकों को नोटिस जारी कर क्लीन चीट दे दिया जाता है यही वजह है कि क्रेशर की वजह से जहां एक तरफ प्रदूषण हो रहा है तो दूसरी तरफ स्थानीय मजदूरों की मौत हो रही है. प्रशासन इस पूरे मामले में कड़ी कार्रवाई करें वरना आने वाले दिनों में इसे लेकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा.



