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ब्रेकिंग : डिप्टी सीएम का फार्मुला हो सकता है समाप्त..बदले जायेंगे मंत्री..लूट लिए गए विधायक..विवादों से दूर तिहार..संपादक अच्युतानंदन द्विवेदी का कालम पढ़िए हलचल

अच्युतानंदन द्विवेदी

सत्ता के गलियारों में यह चर्चा छिड़ चुकी है कि अब डिप्टी सीएम के फार्मुले को समाप्त किया जा सकता है। दरअसल छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में दो-दो डिप्टी सीएम के फार्मुले से रिजल्ट प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं। कहा जा रहा है कि इस फार्मुले से पार्टी के भीतर खेमेबाजी भी बढ़ी है। वहीं प्रशासनिक रुप से अफसर भी खासा दबाव महसूस कर रहे हैं। ऐसे में पार्टी द्वारा भविष्य में डिप्टी सीएम के फार्मुले पर पुनर्विचार किया जा सकता है। दरअसल पार्टी अब यह महसूस कर रही है कि पॉवर सेंटर ज्यादा होने से सरकारी काम-काज ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में सरकारी कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और सरल बनाने पर जोर दिया जा सकता है। संभव है कि भविष्य में राज्यों से डिप्टी सीएम के फार्मुले को समाप्त कर दिया जाए।

रिपोर्ट तैयार, जल्द बदले जाएंगे मंत्री

भाजपा के शीर्ष नेतृत्व द्वारा जून माह में विष्णु सरकार का मूल्यांकन किया जाएगा। दरअसल राज्य सरकार का आधा कार्यकाल बीत चुका है, ऐसे में पार्टी एक बार फिर सरकार के कार्यों का मूल्यांकन करने जा रही है। यह मूल्यांकन प्रशासनिक कार्यो के साथ-साथ मंत्रियों के परफॉमेंस और योजनाओं पर आधारित होगा। जनहित की योजनाओं की प्रगति और संगठन एवं सरकार के बीच समन्वय पर भी जोर दिया जाएगा। इस मूल्यांकन में मंत्रियों के परफॉमेंस का खुलासा होगा, जिससे यह आकलन किया जा सकता है कि किन-किन मंत्रियों को आगे कंटिन्यू करना है और किसे रिप्लेस करना है। कहा जा रहा है कि पार्टी ने इसके लिए खाका भी तैयार कर लिया है और ढाई साल के कार्यकाल की रिपोर्ट भी तैयार कराई जा रही है। दरअसल भाजपा का शीर्ष नेतृत्व छत्तीसगढ़ ही नहीे बल्कि भाजपा शासित पांच राज्यों की सरकारों की रिपोर्ट तैयार करवा रहा है। इसमें यह मूल्यांकन किया जा रहा है कि चुनावी घोषणाओं और जनता से किए वादों को कितना पूरा किया गया है। साथ ही कौन सी योजना ज्यादा प्रभावी है, इसे भी केन्द्र बिन्दु बनाया गया है। यहीं नहीं आधा कार्यकाल बीत जाने के बाद सरकार की छवि कैसे बन रही है, इसका भी मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद ही आगे की रणनीति पर पार्टी विचार करेगी।

विवादों से दूर तिहार

सरकार का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम सुशासन तिहार विवादों से दूर अब समाप्ति की ओर आगे बढ़ रहा है। इस बार सीएम का यह विशेष कार्यक्रम काफी सफल माना जा रहा है। दरअसल 1 मई से शुरु हुए इस कार्यक्रम में कहीं भी कोई विवाद देखने और सुनने को नहीं मिला। तकरीबन एक माह बीत जाने के बाद भी कहीं भी कोई विरोध या बड़ा घटनाक्रम भी नहीं दिखा। जबकि पूर्व में अक्सर विवाद या विरोध देखने, सुनने को मिलते रहे हैं। दरअसल मुख्यमंत्री स्वयं सहज रुप से जनता के पास जाकर उनकी समस्याओं का निराकरण कर रहे है। सीएम के सहज स्वभाव के कारण जनता को भी अपनी बात रखने में झिझक नहीं हो रही है। वहीं सीएम के साथ इस बार अफसरों का वह दल भी मौजूद रहता है, जिन्हें प्रशासनिक कार्यो का अच्छा अनुभव है। संभवतः इसीलिए सुशासन तिहार सफल रूप से सम्पन्न होने जा रहा है।

राजनीतिक गुंडागर्दी या प्रशासनिक आतंक?

कहा जा रहा है कि सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी की जमकर पिटाई कर दी। तहसीलदार लहुलुहान तस्वीर के साथ मीडिया के सामने अपनी पीड़ा जाहिर करते नजर आये, वहीं तहसीलदार की रिपोर्ट पर सत्ताधारी दल के विधायक रामकुमार टोप्पो के खिलाफ पुलिस ने गैर जमानती धाराओं के साथ एफआईआर भी दर्ज कर लिया है। हालांकि विधायक और उनके सर्मथकों द्वारा भी नायब तहसीलदार के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई गई है। लेकिन सवाल यह उठता है कि यह नौबत आई क्यों? वास्तव में क्या राज्य मेें प्रशासनिक आतंक बढ़ गया है? अफसर अब सत्ताधारी दल के विधायकों की भी नहीं सुन रहे? या फिर भाजपा विधायक गुंडागर्दी पर उतर गए हैं? बहरहाल यह दोनों ही विषय अत्यंत गंभीर हैं, जिसका खुलासा जांच के बाद ही हो सकता है। लेकिन यह स्थिति यदि फील्ड में निर्मित हो रही है तो यह चिंतन और मंथन का भी विषय है। अफसरों और नेताओं के बीच तालमेल का आभाव यहां एकदम स्पष्ट दिख रहा है। बहरहाल इसे प्रशासनिक आतंक कहा जाए या राजनीतिक गुंडागर्दी फिलहाल इस पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी।

रिटायरमेंट के बाद भी नहीं बच पायेंगे भ्रष्ट अफसर

भ्रष्टाचार में डूबे अफसरों के लिए बेहद ही बुरी खबर है। अब रिटायरमेंट के बाद भी भ्रष्ट अफसरों से सरकारी राशि की वसूली की जाएगी। दरअसल रिटायरमेंट के बाद भ्रष्टाचार के मामलों की जांच नहीं होती। अब इस पर लोक आयोग ने सख्त अनुशंसा की है। यह प्रावधान है कि रिटायमेंट के बाद चार साल पुराने मामले में विभागीय जांच नहीं हो सकती। अब आयोग ने इस चार साल की सीमा को घटाकर 6 माह करने की अनुशंसा की है। इसमें गबन, वित्तीय अनियमितता, भ्रष्टाचार के मामलों में संलिप्त शासकीय सेवकों के विरुद्ध पेंशन नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों से अभिमत भी मांगा है। अब यहां रिटायर हो चुके या फिर रिटायर होने जा रहे अफसरों के मामलों में छत्तीसगढ सिविल सेवा पेंशन अधिनियम 1976 के नियम 8, 9 और 65 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। अब ऐसे मामलों में पेंशन रोकने की कार्रवाई का भी प्रस्ताव हैं। वहीं शासकीय राशि की क्षति की वसूली नियम 65 के तहत सुनिश्चित करने को भी कहा गया है। कुल मिलाकर भ्रष्टाचार में लिप्त अफसरों की खैर नहीं है, रिटायरमेंंट के बाद भी उन पर नकेल कसने की तैयारी है।

धरम को लूटा, पुरंदर भी लुटे

इन दिनों लुटेरे माननीयों के पीछे पड़ गए हैं, चुन-चुन कर लूट की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक से मोबाइल लूटने के बाद रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा को भी लुटेरों ने लूट लिया। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शााह के छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान धरमलाल कौशिक लुट गए थे। अब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के कथित पीए और ड्राइवर ने मिलकर पुरंदर मिश्रा को लूट लिया। दरअसल पुरंदर मिश्रा के मोबाइल पर नितिन नवीन के कथित पीए का फोन आया और जंगल में फंसे होने की बात कही गई। इतना ही नहीं कथित पीए और ड्राइवर ने यह भी कहा कि परिवार के साथ जंगल में फस गया है, गाड़ी में डीजल भी नहीं है, 4000 रुपये की अत्यंत जरुरत है। धर्म-कर्म में आगे पुरंदर ने सहज भाव से कहा 4 हजार नहीं मै तुम्हे 10 हजार रुपये दे रहा हूं। गाड़ी में डीजल भी डलवाओ और आराम से कहीं परिवार के साथ भोजन भी लो। कुल मिलाकर पुरंदर की नियत किसी सामान्य आदमी की मदद करने की थी, उन्होनें सहज भाव से मदद कर दी। लेकिन कथित पीए की नियत लूट की थी, नतीजन लुटेरा सलाखों के पीछे पहुंच गया।

लेखक दैनिक पायनियर हिंदी/अंग्रेजी के सम्पादक हैं।

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