Blog

स्पेशल स्टोरी : बिजली विभाग का सरकारी विभागों पर बकाया है 2900 करोड़, जानिए कि किन-किन विभागों में कितना बिजली बकाया

यह बकाया नए सत्र के चार माह में और बढ़ने से 32 सौ करोड़ से ज्यादा का बकाया हो गया है। 2025-26 के सत्र में सरकारी विभागों ने 1252 करोड़ की बिजली जलाई। इसमें 814 करोड़ ही मिले और 438 करोड़ का बकाया और रह गया। इसके पहले 2025 मार्च की स्थिति में बकाया 2444.91 करोड़ था जो मार्च 2026 में 2883.42 करोड़ हो गया। अब यह बकाया और बढ़ गया है।

अगर इस बकाया राशि में नेताओं और IAS अधिकारियों के बंगले का बकाया बिजली बिल जोड़ दिया जाये तो यह राशि 5 से
6 हजार करोड़ रूपये तक तक जा सकती है। छत्तीसगढ़ में नेता, मंत्री और सरकारी विभागों को मिलाकर लगभग 3000 हजार करोड़ रूपये बिजली बिल बकाया है, पर बिजली बिल की मार सिर्फ आम आदमी को झेलना पड़ता है। हमारे नेता मंत्री लोग वेतन भत्ते तो लेंगे ही साथ में बिजली का बिल भी नहीं पटायेंगे।

जब केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा संसद में स्पष्ट किया गया है कि घर में बिजली का स्मार्ट मीटर (विशेष रूप से प्रीपेड) लगवाना अनिवार्य नहीं है। यह पूरी तरह से एक वैकल्पिक (Optional) सुविधा है और उपभोक्ताओं पर इसे जबरन नहीं थोपा जा सकता। उत्तरप्रदेश में भी स्मार्ट मीटर लगवाना अनिवार्य नहीं है। हिमाचल प्रदेश में स्मार्ट बिजली मीटरों को लेकर चल रहे विरोध के बीच, अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता की सहमति के बिना घर या दुकान में स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य नहीं है और जबरन मीटर न लगाने पर बिजली कनेक्शन काटने का कोई अधिकार नहीं है।

तो फिर छत्तीसगढ़ की जनता की जनता को स्मार्ट मीटर लगवाने या नहीं लगवाने का विकल्प क्यों नहीं दिया जा रहा रहा है?

ऊपर से कोयला हमारा, बिजली हमारी, पानी हमारा जंगल हमारे कट रहे हैं, हमारे बिजली कोयले से कई राज्य रौशन हो रहे हैं और फ्री बिजली,बिजली सब्सिडी दूसरे राज्यों को और हम छत्तीसगढ़ वालों को सोलर पैनल का चूरन दिया जा रहा है।

उन राज्यों को पहले सोलर पैनल लगाने बोलिए जहां कोयला नहीं है और जहां बिजली नहीं बनती। जो राज्य अपनी आवश्यकता की बिजली खुद बनाता है जहां पर्याप्त कोयला और बिजली उपलब्ध है। उस छत्तीसगढ़ राज्य को सोलर पैनल लगाने के लिए बोलन का कोई लॉजिक नहीं बनता।

नीचे जानिए कि किन-किन विभागों में कितना बिजली बकाया है।

नगरीय निकाय विभाग 1586 करोड़

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग 876 करोड

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग 109 करोड़

स्कूल शिक्षा विभाग 80 करोड़

चिकित्सा विभाग 31 करोड़

जल संसाधन 27 करोड़

गृह विभाग 26 करोड़

आदिम जाति कल्याण विभाग 28 करोड़

महिला बाल विकास 26 करोड़

आवास पर्यावरण विभाग 23 करोड़

लोक निर्माण विभाग 13 करोड़

राजस्व विभाग 12 करोड़

वन विभाग 9 करोड़

कृषि विभाग 3.68 करोड़

पशु पालन विभाग 3 करोड़

कौशल विकास विभाग 3 करोड़

विधि विधायी विभाग 2.42 करोड़

सहकारिता विभाग 3.31 करोड़

उच्च विक्षा विभाग 5.40 करोड़

उद्यानिकी विभाग 2.64 करोड़

जेल विभाग 1.40 करोड़

खेल विभाग 1.03 करोड़।

The Bigul

हमारा आग्रह : एक निष्पक्ष, स्वतंत्र, साहसी और सवाल पूछती पत्रकारिता के लिए हम आपके सहयोग के हकदार हैं. कृपया हमारी आर्थिक मदद करें. आपका सहयोग 'द बिगुल' के लिए संजीवनी साबित होगा.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button