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एसईसीएल का केन्द्रीय अस्पताल में नहीं विशेषज्ञ डॉक्टर, डायलिसिस यूनिट भी बंद, मुश्किल में मरीज

बिगुल
सरगुजा. एसईसीएल का केन्द्रीय अस्पताल विश्रामपुर रेफरल सेंटर बन कर रह गया है. केंद्रीय अस्पताल में करोड़ों की राशि खर्च करने के बाद भी इलाज की सुविधा नाम मात्र है. नेत्र रोग चिकित्सक, शिशु रोग चिकित्स को छोड़कर विशेषज्ञों का अभाव है. अस्पताल प्रबंधन ने एक साल पहले डायलिसिस यूनिट की शुरूआत की थी. डायलिसिस यूनिट से किडनी रोगियों का इलाज स्थानीय स्तर पर करने की उम्मीद जगी थी. महज कुछ दिनों के भीतर बंद हो गया

अब डायलीसिस मशीन को केन्द्रीय अस्पताल प्रबंधन किसी अन्य जगह भेजने की तैयारी कर रहा है. अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डायलिसिस मशीन रखने अधिक खर्च होता है. अस्पताल में मरीजों का नहीं पहुंचना भी कारण बताया जा रहा है. दूसरी ओर गंभीर मरीजों को अस्पताल प्रबंधन तत्काल रेफर करने का फरमान सुना देता है.

लोगों का कहना है कि केन्द्रीय अस्पताल इलाज के नाम पर महज शो पीस बनकर रह गया है. दो दशक पूर्व अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भरमार थी. दूर-दराज के गंभीर मरीज इलाज कराने आते थे. कई गंभीर बीमारियों का सफल ऑपरेशन भी अस्पताल में किया जाता था. कोयलांचल से सटे शिवनन्दनपुर, सतपता, केशवनगर, कुंजनगर, रामनगर, जयनगर सहित दर्जनों गांवों की आबादी की निर्भरता केंद्रीय अस्पताल पर है.

डायलिसिस यूनिट शुरू करने की मांग

हड्डी रोग विशेषज्ञ, नाक कान गला विशेषज्ञ, मेडिसिन विशेषज्ञ, ग्यानो, एनेस्थीसिया जैसे विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है. अब एसईसीएल का केन्द्रीय अस्पताल बदहाली के आंसू बहा रहा है. कम्पनी के मरीजों को बाहर इलाज की सिफारिश केंद्रीय अस्पताल से करानी पड़ती है. यूनियन नेता सुजीत सिंह ने कहा कि डायलीसिस यूनिट शुरू करने की दिशा में प्रबंधन को जरूरी पहल करनी चाहिए. दूर-दराज से पहुंचने वाले मरीजों को लाभ मिल सके.

डॉक्टरों के खाली पदों पर निकली भर्ती

कोयलांचल क्षेत्र में काफी कोल श्रमिक काम करते हैं. कई मरीज किडनी की समस्या से पीड़ित हैं. उन्होंने एसईसीएल प्रबंधन से सकारात्मक कदम उठाते हुए डायलिसिस यूनिट को शुरू किए जाने की मांग की. केन्द्रीय अस्पताल बिश्रामपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीएन सिंह ने बताया कि डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए कोल इंडिया ने भर्ती का विज्ञापन निकाला है. जल्द नए विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति की जायेगी और अस्पताल में डॉक्टरों के रिक्त पदों को भरा जायेगा.

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