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ब्रेकिंग : जमीन बेचने का सौदा कर 34.06 लाख लेने का आरोप, रजिस्ट्री की बजाय बेटे के नाम कर दी जमीन

शिकायत के अनुसार भनपुरी स्थित खसरा नंबर 48/1 की जमीन में जयप्रकाश पाण्डेय का हिस्सा था. उसने अपने हिस्से की करीब 3300 वर्गफुट जमीन, जिस पर दो पक्की दुकानें भी बनी थीं, को 1300 रुपए प्रति वर्गफुट की दर से बिक्रम आदित्य पाण्डेय को बेचने का सौदा किया था. 12 नवंबर 2024 को इकरारनामा भी किया गया. शिकायतकर्ता के मुताबिक इकरारनामे के अनुसार शुरुआत में बैंक के माध्यम से 11.01 लाख रुपए और नकद 11 लाख रुपए दिए गए थे. इसके बाद 16 दिसंबर 2024 को बंटवारे की प्रक्रिया के लिए 5 हजार रुपए और दिए गए.

शिकायतकर्ता का कहना है कि 19 दिसंबर 2025 को जयप्रकाश पाण्डेय ने आर्थिक जरूरत बताते हुए 7 लाख रुपए और मांगे. इसके बाद नया इकरारनामा तैयार किया गया, जिसमें जमीन का क्षेत्रफल 2850 वर्गफुट और सौदे की कुल कीमत 37.05 लाख रुपए दर्शाई गई. इस दौरान पहले दिए गए 29.06 लाख रुपए की प्राप्ति स्वीकार की गई. 30 दिसंबर 2025 को 5 लाख रुपए और दिए गए. इस तरह शिकायतकर्ता के अनुसार जयप्रकाश पाण्डेय ने कुल 34.06 लाख रुपए प्राप्त किए.
कब्जे का प्रमाणपत्र भी देने का दावा

शिकायत में कहा गया है कि 19 दिसंबर 2025 को जयप्रकाश पाण्डेय ने 2850 वर्गफुट जमीन का आधिपत्य प्रमाण पत्र भी दिया था. शिकायतकर्ता के मुताबिक इस जमीन में 150-150 वर्गफुट की दो पक्की दुकानें शामिल थीं. परिवार के सदस्यों की सहमति से संबंधित एक प्रमाण पत्र भी दिए जाने का दावा शिकायत में किया गया है.
रजिस्ट्री कराने की बजाय हक त्याग विलेख

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जमीन का बंटवारा कराने और उसके नाम रजिस्ट्री कराने का आश्वासन देते हुए जयप्रकाश पाण्डेय लगातार समय मांगता रहा. इसी दौरान 3 मार्च 2026 को उसने खसरा नंबर 48/1 में अपने 1/5 हिस्से के संबंध में परिवार के अन्य सदस्यों के पक्ष में हक त्याग विलेख पंजीकृत करा दिया. इसके बाद राजस्व अभिलेख से जयप्रकाश पाण्डेय का नाम हट गया.

इसके बाद शिकायत के अनुसार 17 अप्रैल 2026 को 3086.18 वर्गफुट भूमि, जिसमें शिकायतकर्ता के साथ इकरार की गई 2850 वर्गफुट जमीन और दोनों दुकानें भी शामिल थीं, का पंजीकृत विक्रय विलेख जयप्रकाश पाण्डेय के पुत्र आदित्य कुमार पाण्डेय के नाम करा दिया गया. बाद में यह जमीन आदित्य पाण्डेय के नाम खसरा नंबर 48/3 में दर्ज हो गई.
पहले सिविल कोर्ट में भी पहुंचा था मामला

शिकायतकर्ता ने बताया कि रजिस्ट्री में लगातार देरी होने पर उसने जयप्रकाश पाण्डेय के खिलाफ षष्ठम व्यवहार न्यायाधीश द्वितीय श्रेणी रायपुर की अदालत में व्यवहार वाद क्रमांक ए/0000032/2026 प्रस्तुत किया था. शिकायत के अनुसार मामले की कार्यवाही के दौरान ही संबंधित जमीन का हक त्याग और फिर विक्रय विलेख करा दिया गया. इसके बाद शिकायतकर्ता ने 17 जून 2026 को अदालत की सहमति से उक्त वाद वापस ले लिया.

बिक्रम आदित्य पाण्डेय ने आरोप लगाया है कि जयप्रकाश पाण्डेय और उसके पुत्र आदित्य पाण्डेय ने एकराय होकर जमीन की रजिस्ट्री कराने के नाम पर उससे रकम प्राप्त की और बाद में उसी संपत्ति का स्वामित्व बदल दिया. उसने दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र सहित उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की है. शिकायत के साथ जमीन और भुगतान से संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां भी संलग्न किए जाने की बात कही गई है.

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