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हिंदी अकादमी सम्मान : 16 पुरस्कारों के लिए आवेदन आमंत्रित, पं दीनदयाल उपाध्याय अटल बिहारी बाजपेयी, सीएसआईडीसी चेयरमैन राजीव अग्रवाल के चाचा देवेन्द्र स्वरूप के नाम पर शुरू हुआ पुरस्कार

रायपुर. दिल्ली सरकार की हिंदी अकादमी ने साहित्य के क्षेत्र में 16 नए पुरस्कार प्रारंभ करते हुए सम्मान हेतु आवेदन—पत्र आमंत्रित किए हैं। सबसे बड़ा सम्मान पं दीनदयाल उपाध्याय शलाका सम्मान है जो सात लाख रूपये का है। अटल बिहारी बाजपेयी के नाम पर भी एक सम्मान दिया जायेगा जिसकी राशि पांच लाख रूपये है। विशेष बात यह है कि एक लाख रूपये का ‘देवेन्द्र स्वरूप भारतीय वांगमय सम्मान’ भी दिया जायेगा। सभी 16 श्रेणी में आवेदन पत्र आमंत्रित किए गए हैं।

दिल्ली सरकार ने इसके अलावा रानी अहिल्याबाई होलकर सम्मान दो लाख रूपये, संत रविदास सम्मान दो लाख रूपये, वीर सावरकर सम्मान दो लाख रूपए का दिया जाएगा। इसके अलावा पं मदन मोहन मालवीय सम्मान, बाबा जोरावर सिंह सम्मान, स्वामी विवेकानंद युवा प्रतिभा सम्मान, विद्यानिवास मिश्र सम्मान, निर्मल वर्मा हिंन्दी अनुवाद सम्मान, विजय कुमार मल्होत्रा सम्मान, रामचंद्र शुक्ल सम्मान, वासुदेव शरण अग्रवाल, देवेन्द्र स्वरूप सम्मान, मृदुला सिन्हा सम्मान एवं नरेन्द्र कोहली सम्मान प्रत्येक एक लाख का सम्मान दिया जायेगा।

देवेंद्र स्वरूप ने एक दर्जन से अधिक पुस्तकें रचीं : राजीव अग्रवाल

जानते चलें कि साहित्यकार देवेन्द्र स्वरूप देश के जाने माने साहित्यकार रहे। वे भाजपा नेता एवं सीएसआईडीसी के चेयरमैन, केबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त, राजीव कुमार अग्रवाल के सगे चाचाजी थे। श्री अग्रवाल ने कहा कि चाचाजी ने एक दर्जन से अधिक पुस्तकों की रचना की। उन्होंने पहले आरएसएस प्रचारक के रूप में कार्य किया और बाद में गृहस्थ ऋृषि होकर खूब साहित्य रचा। उनकी एक दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं जिनमें अयोध्या का सच’ पुस्तक और संविधान भारत का या अंग्रेजों का’ पुस्तक काफी लोकप्रिय रही। श्रीरामजन्मभूमि प्रकरण जब न्यायालय में चल रहा था तब साहित्यकार देवेन्द्र स्वरूप द्वारा इकटठे किए गए बहुत से सबूत न्यायालय में रखे गए जिससे श्रीराम मंदिर बनाने का मार्ग प्रशस्त करने में मदद मिली। उन्होंने दिल्ली सरकार का आभार जताया जिसने साहित्यकार देवेन्द्र स्वरूप के नाम पर एक लाख रूपये का पुरस्कार प्रारंभ किया है।

‘देवेन्द्र स्वरूप को पढ़कर हम बड़े हुए’

वरिष्ठ पत्रकार डॉ अनिल द्विवेदी ने साहित्यकार देवेन्द्र स्वरूप को याद करते हुए कहा कि वे जाने माने संघ विचारक थे पांचजन्य, राष्ट्रधर्म, स्वदेश में उनके लेख लगातार प्रकाशित होते थे और मैं उनका नियमित पाठक था। विशेषकर रामजन्मभूमि आंदोलन के दौरान देवेन्द्र स्वरूप जी के लिखे लेख प्रमाण के तौर पर अदालत में काम आए। उनका व्याख्यान सुनने का मौका भी एक दो बार हासिल हुआ। ऐसी शख्सियत पर पुरस्कार का शुरू होना उन्हें सच्चे अ​र्थों में श्रद्धां​जलि देना है।

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