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कांकेर का रहस्यमयी तालाब! जिसका पानी कभी नहीं सूखता, लोगों की है गहरी आस्था, जानें मान्यता

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कांकेर भीषण गर्मी में जहां नदी, नाले और तालाब सूख चुके हैं, वहीं कांकेर जिले के गढ़िया पहाड़ की चोटी पर स्थित एक ऐसा तालाब है जो कभी नहीं सूखता. समुद्र तल से करीब 700 फीट ऊंचाई पर स्थित इस तालाब को लेकर लोगों में गहरी आस्था है.

कांकेर में एक ओर भीषण गर्मी में जहां नदी, नाले और तालाब सूख चुके हैं, वहीं कांकेर जिले के गढ़िया पहाड़ की चोटी पर स्थित एक ऐसा तालाब है जो कभी नहीं सूखता. समुद्र तल से करीब 700 फीट ऊंचाई पर स्थित इस तालाब को लेकर लोगों में गहरी आस्था है. मान्यता है कि राजा की दो बेटियां आज भी इसकी रक्षा करती हैं.

रहस्यमयी तालाब, जिसका पानी कभी नहीं सूखता
देशभर में भीषण गर्मी का दौर जारी है. जलस्तर लगातार गिर रहा है, नदियां, नाले और तालाब सूखते जा रहे हैं. कई जगहों पर पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है, लेकिन कांकेर के गढ़िया पहाड़ की चोटी पर मौजूद यह तालाब आज भी पानी से लबालब भरा हुआ है. 700 फीट ऊंचाई पर स्थित यह तालाब भीषण गर्मी में भी कभी नहीं सूखता, जिससे यह लोगों के लिए कौतूहल और रहस्य का विषय बना हुआ है.

जानें क्या है मान्यता?
इस तालाब से जुड़ी एक प्राचीन किंवदंती भी है. राजपरिवार और इतिहास के जानकार आसित दुबे बताते हैं कि गढ़िया पहाड़ कभी राजा तनुदेव का गढ़ हुआ करता था. उस समय यहां पानी का केवल एक छोटा सा कुंड था, जिससे जरूरत पूरी नहीं हो पाती थी. राजा की दो पुत्रियां थीं – सोनई और रुपई. कहा जाता है कि दोनों को जलदेवी का आशीर्वाद प्राप्त था. एक दिन खेल-खेल में उन्होंने जलदेवी का आह्वान किया और अचानक यह स्थान जल से भर गया. मान्यताओं के अनुसार दोनों बहनें उसी जल में समा गईं और आज भी इस तालाब की रक्षा करती हैं. स्थानीय लोगों की आस्था है कि चाहे कितनी भी गर्मी पड़े, यह तालाब कभी नहीं सूखेगा.
हालांकि इस रहस्य को विज्ञान अलग नजरिए से देखता है. भूगोल के प्रोफेसर डॉ. शिवेंद्र कुमार ध्रुवे के अनुसार प्राचीन काल में किसी भूगर्भीय गतिविधि या ज्वालामुखीय प्रक्रिया के कारण यहां तालाब जैसी संरचना बनी होगी. क्षेत्र की कुछ चट्टानें ऐसी हैं. जिनमें जल का रिसाव बेहद कम होता है. वहीं आसपास की वनस्पतियां और प्राकृतिक तत्व जल संरक्षण में मदद करते हैं. ऊंचाई पर तापमान अपेक्षाकृत कम रहने से भी पानी का वाष्पीकरण कम होता है, जिसके कारण तालाब लंबे समय तक भरा रहता है.

लोगों की है आस्था
स्थानीय लोगों के लिए यह सिर्फ एक तालाब नहीं बल्कि आस्था का केंद्र है. दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं. लोगों का मानना है कि इस तालाब का पानी कभी खत्म नहीं होता और यह क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

कहानियां अपनी जगह हैं और विज्ञान के अपने तर्क, लेकिन 700 फीट ऊंचे पहाड़ पर स्थित इस तालाब का भीषण गर्मी में भी पानी से भरा रहना आज भी लोगों को हैरान करता है. आस्था और विज्ञान के बीच खड़ा यह रहस्यमयी तालाब कांकेर की एक ऐसी अनसुलझी पहेली है, जो आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है.

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