चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ ने बस्तर में बरपाया कहर: बाढ़ से हजारों हेक्टेयर फसल तबाह, किसानों को मुआवजे की चिंता

बिगुल
चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के बाद आई भयानक बाढ़ ने छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में किसानों की कमर तोड़ दी है. बाढ़ के पानी ने हजारों हेक्टेयर में उगाई जाने वाली मुख्य धान की फसल और मिर्च की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है. इस प्राकृतिक आपदा के बाद स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग ने नुकसान का आकलन करने के लिए सर्वे शुरू किया है. हालांकि, जलभराव और रास्तों के दुर्गम होने के कारण सर्वे टीमें कई प्रभावित इलाकों तक नहीं पहुंच पाई हैं, जिससे कुल नुकसान का आधिकारिक आंकड़ा अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है.
किसानों को मुआवजे की चिंता
इस बीच, किसान मुआवजे की रकम को लेकर भी चिंतित हैं. राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC 6-4) के तहत, फसल के नुकसान के लिए दी जाने वाली आर्थिक मदद नुकसान की प्रकृति और जमीन सिंचित है या असिंचित, इस आधार पर तय की जाती है. किसानों का कहना है कि अधिकारी लगभग ₹8,000 प्रति हेक्टेयर मुआवजे का प्रस्ताव दे रहे हैं, जो उन्हें अपर्याप्त लगता है और वे इसके बजाय फसल की बिक्री के आंकड़ों के आधार पर 21 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से मुआवजे की मांग कर रहे हैं. इसके अलावा, कई किसान बीमा भुगतान की मांग कर रहे हैं और सरकार से बाढ़ की आपदा को देखते हुए विशेष राहत देकर उनके कर्ज माफ करने का आग्रह कर रहे हैं.
ठोस कदम उठाने की जरूरत
बस्तर में आई इस भीषण आपदा ने एक बार फिर प्राकृतिक आपदा के समय प्रशासनिक राहत और मुआवजे के इंतजामों की कमियों को उजागर कर दिया है. चक्रवाती तूफान से हुए भारी नुकसान के बाद अब किसानों का भविष्य पूरी तरह से सरकारी मदद, नुकसान का जल्द आकलन और उचित मुआवजे पर निर्भर है. ऐसे में राज्य सरकार और जिला प्रशासन के लिए जमीनी हकीकत को समझना और सर्वे की प्रक्रिया को जल्द पूरा करना बहुत जरूरी है. बस्तर के किसानों को भुखमरी और आर्थिक तंगी से बचाने के लिए अभी ठोस कदम उठाने की जरूरत है.



